भाजपा उम्मीदवारों की घोषणा में होने वाली देरी का खमियाज़ा पार्टी उम्मीदवारों को चुनावों में पड़ सकता है भुगतना


अमृतसर, 19 अप्रैल (अ.स.): लोकसभा चुनावों का दौर चल रहा है। एक तरफ देश में दो चरणों में चुनाव हो चुके हैं और तीसरे चरण के चुनावों की तैयारियां चल रही हैं। पंजाब में सातवें चरण में चुनाव 19 मई को होंगे, जिसके लिए एक माह का समय रह गया है परंतु भाजपा द्वारा अभी तक पंजाब की तीनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा न किए जाने के कारण यह पार्टी प्रचार के पक्ष से अन्य पार्टियों से पिछड़ रही है, जिसका खमियाज़ा पार्टी को इन चुनावाें में भुगतना पड़ सकता है। पंजाब की 13 सीटों में से भाजपा द्वारा तीन सीटों अमृतसर, गुरदासपुर व होशियारपुर से अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे जाएंगे परंतु इन उम्मीदवारों की घोषणा की नज़र पार्टी हाईकमान पर टिकी हुई है। स्थानीय स्तर पर घोषित किए गए उम्मीदवारों के दावे सूची व भाजपा संसदीय कमेटी द्वारा अपनी रिपोर्ट कई दिन पहले ही पार्टी हाईकमान को सौंप दी गई है। इसके अलावा यह भी पता चला है कि पार्टी हाईकमान द्वारा कार्यकर्त्ता स्तर पर उम्मीदवारों की कार्यप्रणाली व उसके सहयोग संबंधी जानकारी एकत्रित कर ली है परंतु इसके बावजूद उम्मीदवारों की घोषणा की स्थिति आज कल वाली बनी हुई है। ऐसे हालातों में जहां कई प्रकार की अटकलें लगाई जा रही हैं वहीं प्रतिदिन पार्टी उम्मीदवारों की घोषणा संबंधी अफवाहों का बाज़ार भी गर्म है। विशेषकर सोशल मीडिया पर कई प्रकार की चर्चा चल रही है। कहीं अमृतसर लोकसभा क्षेत्र से सनी दयोल को उम्मीदवार घोषित किए जाने की चर्चा चल रही है और होशियारपुर से विजय सांपला व गुरदासपुर से स्वर्ण सलारिया के नामों की चर्चा चल रही है। इससे पूर्व यदि अमृतसर की बात की जाए तो इससे पहले अभिनेत्री पूनम ढिल्लों व किरन खेर के नामों की चर्चा रही है परंतु धीरे-धीरे इन चर्चाओं को विश्राम लगना शुरू हो गया है और अब सन्नी दयोल के नाम की चर्चा है। यहां तक कि भाजपा के किसी कार्यकर्त्ता को भी पार्टी उम्मीदवार बारे पूछे जाने पर वह सन्नी दयोल का नाम लेता है। जहां तक स्थानीय दावेदारों बारे बातचीत की जाए तो सबसे मजबूत दावेदार के रूप में जाने जाते राजिंदरमोहन सिंह छीना द्वारा लोगों के साथ सम्पर्क किया जा रहा है। इसके अलावा कुछ हद तक पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी भी अपने स्तर पर कार्यकर्ताओं को लामबंद कर रहे हैं परंतु देखना यह है कि भाजपा का गणित किसी पर  उचित बैठता है।