धरती को निचोड़ रहा स्वार्थ का जुनून


जालंधर, 5 जून (जसपाल सिंह) : वोटों की राजनीति इस वक्त इतनी हावी हो चुकी है धरती को बांझ बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जा रही। नेता अपने वोट बैंक पक्का करने में मस्त हैं तो किसान अपना स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हैं और धरती मां हर तरह से पस्त है। पहले तो किसानों ने सरेआम किसी न किसी बहाने नाड़ को आग लगाकर खर्चा कम करने के लिए धरती जलाई और अब धान की बिजाई के नाम पर समय से पहले ही सरकारी हिदायतों को दरकिनार करके पानी को अंधाधुधं दोहन करके बांझ बनाया जा रहा है। गौरततलब है कि सरकारी हिदायतों के अनुसार यानी कि कृषि विभाग ने साफ तौर पर आदेश दे रखे हैं जो 20 जून धान की बिजाई के लिए निर्धारित की गई है उससे पहले धान की बिजाई नहीं की जाएगी पर किसानों पर स्वार्थ का जुनून इस कदर हावी है कि उनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगे रही। किसान दवा लगाने का बहाना बनाकर अंधाधुंध खेतों में पानी लगाकर भूजल स्तर लगातार नीचे गिराते जा रहे हैं जोकि भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। वहीं कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। न ही सरकार और न ही विभाग कोई सख्त कार्रवाई करने के मूड में दिखाई दे रहे हैं। वोट बैंक की भूख इतनी बढ़ गई है कि वो हर जगह हावी होने लगी है। कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जी रही। हलांकि कृषि विभाग के अधिकारी मानते हैं कि समय से पहले खेतों को अंधाधुंध पानी लगाना वातावरण से खिलवाड़ है इससे पानी का स्तर गिरेगा। आंकड़ों की सच्चाई बयां करती है हालात : जानकारी अनुसार हर साल 37 सैं.मी. की रफ्तार से पानी नीचे गिरता जा रहा है। पंजाब के 118 ब्लाकों में 116 ब्लाकों में भूजल बेहताशा पानी के दोहन के कारण नीचे गिर गया है। सबसे बुरी हालत इस समय जालंधर, लुधियाना व अमृतसर की। राज्य में करीब 13 लाख ट्यूबवैल हर रोज़ धरती को धीरे-धीरे निचोड़ रहे हैं। जिस तरह से पानी का दोहन जारी है ऐसे में आने वाले समय में पंजाब पंज-आब न होकर मारूस्थल बन जाएगा।