जी.एस.टी की 30 को रिटर्न दाखिल करने को लेकर डीलरों की नींद उड़ी


जालन्धर, 10 जून (शिव शर्मा): पहले वर्ष तो नई लागू हुई कर प्रणाली जी.एस.टी. को लेकर व्यापारियों, उद्योगपतियों सहित हर वर्ग परेशान था और अब यदि  जी.एस.टी. की लोगों को कुछ समझ आई तो अब 30 जून को वर्ष 2017-18 को जी.एस.टी. के भरे जाने वाले हिसाब रिटर्न को लेकर डीलरों की नींद उड़ गई है क्योंकि 2016 में जी.एस.टी. लागू हुआ था तो उस समय लोगों को ज्यादा समझ नहीं आया था। उस समय एक वर्ष बाद 2017-2018 में लोगों ने फार्म भरते समय कई गलतियां की थीं। अब जब 30 जून को वार्षिक रिटर्न भरी जानी है तो पिछली गलतियाें के कारण लोगों को परेशानी हो रही है क्योंकि उनकी गलतियां अब ठीक नहीं हो रहीं। 30 जून को भरी जाने वाली रिटर्न के जी.एस.टी. 9 का फार्म भरना ही बेहद कठिन है। इसे हिसाब विषय की तरह बेहद कठिन रूप से भरना पड़ता है जिस कारण फार्म भरने के लिए तो हर माहिरों तक को परेशानी हो रही है।  फार्म इस तरह का बना है कि यदि उन्होंने इसका जवाब हिसाब तरीके से नहीं दिया तो यह गलत हो जाएगा और यह डीलर की ओर ज्यादा जी.एस.टी. निकलता दिखा देता है। और तो और अब विभाग ने अब फार्म जमा करवाने के साथ आडिटर की सिफारिश भी साथ दर्ज करनी ज़रूरी कर  दी है जिसमें आडिटर के लिए सुझाव देना पड़ता है। लोगों ने दो वर्ष पहले भरे गए फार्मों को ज्यादा समझ न होने के कारण भर दिया था जिनमें बेहद गलतियां थीं और अब रिटर्नें भरने के लिए फार्म भरना ही काफी कठिन है जिस कारण रिटर्नें भरने वालों की संख्या बेहद कम है। देशभर में 65 से 70 लाख के करीब जीएसटी की रिटर्नें भरी जाएंगी और सूत्रों की मानें तो अब तक देशभर में 4 लाख के करीब रिटर्नें भरी हैं। यदि किसी ने पहले फार्मों में गलत जानकारियां भरी हैं। उनमें कई लोगों को ज्यादा कर लग सकता है और विभाग ने इस मामले में लोगों को राहत नहीं दे रहा है। कर माहिर पुनीत ओबराय का कहना था कि रिटर्न भरने के लिए लोगों में बेहद बेचैनी है क्योंकि दो वर्ष पहले उन्हें फार्मों को भरने में ज्यादा जानकारी नहीं थी जिस कारण गलतियां हुई थीं परंतु अब विभाग को इन गलतियाें को दूर करने में सहयोग करना चाहिए।