मैडीकल दाखिले के लिए विद्यार्थियों के चेहरों से रौणक उड़ी, दूसरे राज्य के बच्चे भी ले सकेंगे दाखिला


फाज़िल्का, 14 जून (अ.स.) : पंजाब की कैप्टन अमरेन्द्र सिंह की सरकार द्वारा एस.बी.बी.एस. और बी.डी.एस. में दाखिला लेने के लिए जारी किए नये नोटिफिकेशन से पंजाब के सैकड़ों डाक्टर बनने के चाहवान उम्मीदवारों और उनके पारिवारिक सदस्यों के चेहरों की रोणक उड़ गई हैं। देश के तमाम राज्यों में से पंजाब एक जैसा राज्य है, जिसके वासी विर्द्यार्थियों को मैडीकल में दाखिला लेने के लिए अपनी ही सरकार के बनाए नियमों की धक्केशाही का शिकार होना पड़ रहा है। पिछली अकाली भाजपा सरकार ने माननीय हाईकोट के फैसले अनुसार एक नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि एम.बी.बी.एस. और बी.डी.एस. के सैशन 2019-20 के दाखिले समय सिर्फ पंजाब के वासी उम्मीदवारों के अलावा 10वीं और 12वीं कक्षा पंजाब के किसी स्कूल से पास की हो, दाखिले के लिए योग्य होगा। क्योंकि देश के अन्य राज्यों में पंजाब के विद्यार्थी सिर्फ 15 प्रतिशत कोटे में ही दाखिला ले सकते हैं। सिर्फ पंजाब ही एक ऐसा राज्य है जहां पड़ोसी राज्यों के विद्यार्थी भी पंजाब सरकार की छूट कारण पंजाब के कालेजों में दाखिला ले लेते थे। जिससे पंजाब के विद्यार्थियों का हक छीना जाता था। जबकि अब 2019-20 का नया सैशन शुरू होने जा रहा है तो पंजाब सरकार ने अकाली भाजपा सरकार द्वारा नोटिफिकेशन रद्द करके नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। नये नोटिफिकेशन अनुसार 12वीं कक्षा पंजाब से पास हुई होगी, 5 वर्ष राज्य कें अन्य स्कूलों में शिक्षा प्राप्त की हो, विद्यार्थी पंजाब सरकार के पैंशन धारक का बच्चा हो, जिन अभिभावकों की जायदाद पंजाब में हो, जो परिवार पिछले 5 वर्ष से पंजाब में रहे हो, बच्चा पंजाब में पैदा हुआ हो, बच्च के मां-बाप पंजाब सरकार के मुलाज़िम हों, केन्द्र सरकार के मुलाज़िम जो पंजाब या चंडीगढ़ में नौकरी कर रहे हों, उनके बच्चे ही पंजाब के मैडीकल कालेजों में दाखिला ले सकते हैं। इस तरह मैडीकल पढ़ रहे बच्चों के मां-बाप ने बताया कि नीट की परीक्षा का परिणाम आने के दूसरे दिन ही पंजाब सरकार ने नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इससे दूसरे राज्यों के विद्यार्थी 12वीं की परीक्षा पंजाब में पास कर पंजाब के विद्यार्थियों के 85 प्रतिशत कोटे में शामिल हो जाते हैं। इस तरह पंजाब के विद्यार्थियों का भारी नुकसान होता है। विद्यार्थियों के अभिभावकों का कहना है कि पंजाब के विद्यार्थियों को भी पड़ोसी राज्यों में 15 के स्थान पर 85 प्रतिशत कोटे में शामिल किया जाए। विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का कहना है कि कैप्टन सरकार ने पंजाब के विद्यार्थियों का हक पंजाब की अफसरशाही और धनाढ्य लोगों को खुश करने के लिए किया है। इसका गरीब और मध्यवर्गीय लोगों पर भारी असर पड़ेगा।