प्रवासी मज़दूरों की कमी के कारण धान की रोपाई का काम पिछड़ने के आसार


जगराओं, 17 जून (अ.स.): राज्य में धान की रोपाई का काम 13 जून से शुरू हो चुका है परन्तु भीषण गर्मी व मज़दूरों की कमी के कारण इस बार धान की रोपाई का काम काफी पिछड़ सकता है जिससे राज्य में धान की रोपाई का काम भी संबंधित तौर पर पिछड़ जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार 3-4 वर्ष पहले जिस तरह यू.पी. व बिहार से मज़दूर धान की रोपाई के सीजन दौरान काफिले बनाकर पंजाब आते थे, वह मज़दूर पिछले 2 वर्षों से आमद काफी कम हो चुकी है परन्तु इस बार तो प्रवासी मज़दूर नाममात्र ही पंजाब में धान लगाने के लिए आ रहे हैं जिसका कारण उपरोक्त राज्यों में ही मज़दूरों को नरेगा द्वारा मिल रहा काम माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त अब यू.पी. व बिहार राज्यों में भी धान की फसल की काश्त होने लगी, होना समझा जा रहा। दूसरी ओर प्रवासी मज़दूरों की कमी के कारण धान की रोपाई की मज़दूरी भी आसमान छूने लगी है। पिछले वर्ष मालवा क्षेत्र में धान की रोपाई का रेट प्रति एकड़ 2200 के आस-पास रहा, परन्तु इस बार मज़दूर 3500 रुपए प्रति एकड़ की मांग कर रहे हैं। एकत्र की जानकारी अनुसार दिन चढ़ते ही मालवा क्षेत्र के किसान प्रवासी मज़दूरों को लेने के लिए लुधियाना के रेलवे स्टेशन पहुंच जाते हैं परन्तु इस बार लुधियाना रेलवे स्टेशन पर पहुंच रही रेल गाड़ियों में प्रवासी मज़दूर न उतरने के कारण किसानों को देर रात निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। किसान बूटा सिंह ने बताया कि पिछले वर्षों में प्रवासी मज़दूर किसानों के पास पहुंच जाते थे, परन्तु इस बार बहुत कम मज़दूर घान लगाने के लिए पंजाब पहुंचे हैं।