अमृतसर की धरती के नीचे मौजूद हैं सिंधू घाटी सभ्यता के चिन्ह


अमृतसर, 18 जून (सुरिंदर कोछड़): यह एहसास कितना रोमांचक है कि हम जिस ज़मीन पर चल रहे हैं, उसके बिल्कुल नीचे बहुत प्राचीन सभ्यता के चिन्ह मिल सकते हैं। अमृतसर के साथ लगते कुछ इलाकों से खुदाई के दौरान मिली दुर्लभ व पुरातन वस्तुओं ने यह साबित कर दिया है कि मौजूदा समय जिस धरती पर अमृतसर आबाद है, वहां 5 या 6 हज़ार वर्ष पहले कोई सभ्यता विकसित थी। बताया जा रहा है कि पुरातत्व खोजकर्ताओं द्वारा अमृतसर के कोटली वसावा सिंह, अलगो कोठी, भिक्खीविंड, पक्का पिंड अटारी,  रसूलपुर, उड़धन, बुड्ढा थेह, बंडाला व हरसा छीना आदि स्थानों की, की गई खुदाई के दौरान बड़ी संख्या में पत्थर व धातुओं के पुरातन सिक्के, गहने, ईंटें, मटके, खिलौने, बर्तन, बैलगाड़ी के पहिए तथा अन्य बहुत सीं दुर्लभ वस्तुएं निकाली जा चुकी हैं। हाल ही में खुदाई के दौरान भी हरसा छीना व खेमकरन से कुशान सभ्यता की अनेक वस्तुएं मिली हैं। कोटली वसावा सिंह में से खुदाई के दौरान भी मटर के दाने  जितने असंख्य सिक्के मिल चुके हैं। पुरातत्व खोजकर्ताओं द्वारा कोटली वसावा सिंह में मौजूद तालाब को सरवण कुमार से संबंधित बताया जा रहा है और दावा किया जा रहा है कि यह तालाब खुद राजा दशरथ ने बनवाया था। इस क्षेत्र में बहुत सारे थेह भी मौजूद हैं जिनमें से कुछ लगभग 1500 वर्ष पुराने व कुछ कुशान पीरियड के बताए जा रहे हैं। यहां आसपास इलाकों में खुदाई के दौरान बुद्ध सतूप भी मिल चुके हैं। इसी प्रकार फतेहगढ़-अजनाला रोड से कोई दो किलोमीटर की दूरी पर तथा फतेहगढ़-मजीठा रोड पर पड़ते गांव मानखेरा में भी बहुत पुराने थेह मौजूद हैं। गांव वासियों का दावा है कि उन्हें वहां से खुदाई के दौरान मिट्टी के बर्तन व कई सिक्के मिले हैं। इसके अलावा गांव फतेहगढ़ चूड़ियां से अजनाला की ओर जाते लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर गांव मोहन भंडारिया में भी भारी मात्रा थेह मौजूद हैं। यह भी पता चला है कि कुछ समय पहले यह थेह लगभग 200 एकड़ में फैले हुए थे जबकि अब अवैध रूप से की जा रही खुदाई के चलते इनका दायरा 5 एकड़ से भी कम और ऊंचाई मात्र 27 फुट के करीब रह गई है।