बारिश का पानी इकट्ठा होने से डेंगू के मामले बढ़ने का खतरा


पटियाला, 17 जुलाई (अ.स.) : उत्तरी भारत और पंजाब में पिछले एक सप्ताह से बारिश होने के कारण राज्य के लगभग सभी ज़िलों में जगह-जगह पानी इकट्ठा हो गया है, जिस कारण डेंगू फैलने वाले मच्छर के बढ़ने का खतरा बन गया है बल्कि पंजाब वासियों को हर वर्ष किसी न किसी मौसमी बीमारी का प्रकोप झेलना पड़ता है। जिनमें एक मच्छर के काटने से फैलती बीमारी डेंगू है। जिसमें पिछले 7 वर्षों दौरान कई गुणा बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों मुताबिक 2015 से लेकर 2018 तक पंजाब भर 79 व्यक्तियों की डेंगू के बुखार होने के कारण मौत होने की पुष्टि हो चुकी है बल्कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेंगू का सीज़न आने से पहले डेंगू से निपटने के लिए प्रयास करने का दावा हर वर्ष किया जाता है परंतु फिर भी पंजाब में डेंगू से पीड़ित होने वाले मरीज़ों की संख्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है। आंकड़ों अनुसार वर्ष 2012 में पंजाब भर में 770 मरीज़ डेंगू के बुखार से पीड़ित हुए हैं। जबकि यह संख्या 2013 में 4117 थी और वर्ष 2014 में पंजाभर में सिर्फ 472 मरीज़ डेंगू से पीड़ित हुए हैं। इसके उल्ट 2015 में डेंगू के मरीज़ों की संख्या बढ़ कर 14149 हो गई थी। 2016 में यह आंकड़ा घट कर 10 हज़ार 429 रह गया था। परंतु 2017 में डेंगू से पंजाबभर में 15 हज़ार 398 और 2018 में 15 हज़ार 9 व्यक्तियों को डेंगू का बुखार चढ़ा था। डेंगू के मामले बढ़ने संबंधी माहिर डाक्टरों का कहना है कि मौसम में तबदीली होने के कारण पर बेमौसमी बरसात कारण डेंगू फैलने वाला मच्छर बढ़ता है। उन्होंने बताया कि राज्य के लोगों को डेंगू के बुखार संबंधी जारूक करके ही इससे बचा जा सकता है। इस संबंधी माहिर डाक्टरों का कहना है कि एडीज़ मच्छर ही डेंगू, चिकनगुनिया और ज़ीका वायरस के लिए जिम्मेवार है और इसका लारवा उन घरों में पनपता है जहां साफ पानी का खुला स्त्रोत हो, उन्होंने बताया कि धारीदार काला मच्छर, जिसको चीका मच्छर भी कहते हैं, दिन के समय काटता है और सुबह-शाम अधिक क्रियाशील होता है। इसकी उडारी अपने प्रजनन स्थान से 200 मीटर के घेरे में होती है। इसके इलाज के लिए इस मच्छर का खात्मा जरूरी है क्योंकि आज तक इसका कोई एंटीवायरस या वैक्सीन तैयार नहीं हुआ और यह मच्छर मनुष्य के खून से बीमारी आगे फैलाता है पर भ्रम की ज़रूरत नहीं क्योंकि यह कोई छूत की बीमारी नहीं है।