शर्मनाक घटनाक्रम


सरकार चाहे कोई भी हो और किसी भी पार्टी से संबंध रखती हो, परन्तु जब तक अलग-अलग वर्गों के कुछ लोगों की मानसिकता नहीं बदलती, तब तक ऐसी खौफनाक घटनाएं सामने आती रहेंगी, जिनसे समूचा समाज शर्मसार होता है। गत दिनों ज़िला संगरूर के चंगालीवाल गांव में जगमेल सिंह के साथ हुई घटना भी ऐसा कुछ ही दर्शाती है। इस घटना में जातिवाद के साथ-साथ तराजू में तुली आर्थिकता भी दिखाई देती है। दलित भाईचारे से संबंध रखते जगमेल सिंह का दूसरी पार्टी के साथ पैसों के लेन-देन पर विवाद हो गया, जिस कारण दोनों में टकराव हुआ। बात पंचायत तक पहुंची। पंचायत द्वारा करवाए गए फैसले को देखते हुए दूसरे गुट के व्यक्तियों ने दिन-दहाड़े पंच के घर जगमेल सिंह को बुलाकर, उसको बांध कर पूरी बर्बरता से उसकी पिटाई की। यहां तक कि उसके द्वारा पानी मांगने पर भी उसको पेशाब पीने के लिए मजबूर किया गया। सप्ताह भर लहरागागा और संगरूर के अस्पतालों में उसका इलाज होता रहा। अंतत: हालत बेहद बिगड़ने के कुछ दिन बाद उसको चंडीगढ़ पी.जी.आई. में दाखिल करवाया गया। लगभग दो वर्ष पूर्व जगमेल सिंह के भाई गुरतेज सिंह को भी विरोधी गुट के कुछ लोगों ने पीटा था और उसकी दोनों बाजू भी तोड़ दी गई थी। इस कांड ने जहां राज्य में शांति व्यवस्था की बेहद बिगड़ती स्थिति को एक बार पुन: प्रकट किया है, वहीं इस बात का भी एहसास होता है कि आज भी शक्तिशाली गुट कानून की परवाह नहीं करते और अपनी शक्ति के बलबूते पर वह गरीब लोगों को दबाने की मानसिकता पाल लेते हैं। चाहे शांति-व्यवस्था की खराब स्थिति के लिए आज अलग-अलग पार्टियों से संबंधित राजनीतिज्ञ कांग्रेस सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। ऐसी भयानक घटनाएं होने के कारण सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से बच भी नहीं सकती। परन्तु अकाली दल-भाजपा की सरकार के समय दिसम्बर 2015 में भीम टांक हत्या केस की भी बड़ी चर्चा हुई थी, जब अकाली नेता कहे जाते शिव लाल डोडा के फार्म पर भीम टांक को बुरी तरह से मार-पीट कर उसके हाथ-पांव काट दिए गए थे और बाद में उसकी मौत हो गई थी। चाहे चार वर्ष बाद शिव लाल डोडा सहित 24 व्यक्तियों को उम्रकैद की सज़ा तो सुना दी गई थी, परन्तु इससे पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं हुआ था। ऐसा ही एक केस हरियाणा के एक अमीरजादे द्वारा दिल्ली में जैसिका लाल को रैस्टोरेंट में सरेआम गोली मार कर मार देने का सामने आया था, जिसका दोषी अब सज़ा भुगत रहा है। पंजाब के साथ-साथ समूचे भारत में आजकल जातिवाद हावी हुआ प्रतीत होता है। इसके साथ-साथ अमीर लोगों की मानसिकता भी आम लोगों को दबाने की बन गई है। चाहे ऐसे मामलों संबंधी अदालतें कानून के अनुसार समय पाकर अपना फैसला देती हैं, परन्तु जगमेल के साथ जो कुछ घिनौना हुआ है, इस तरह के मामलों के संबंध में न्याय दिलाने के लिए विशेष अदालतें बननी चाहिए और जितनी शीघ्र सम्भव हो दोषियों को कड़ी सज़ाएं देनी चाहिएं, ताकि ऐसे फैसले समाज में एक उदाहरण बन सकें। चाहे इस तरह की सदियों से पैदा हुई मानसिकता को खत्म न किया जा सके, परन्तु इसको बड़ी सीमा तक कम अवश्य किया जा सकता है। समाज के अलग-अलग वर्गों द्वारा ऐसी घटनाओं के संबंध में जो कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं, से भी दोषी मानसिकता वाले व्यक्तियों पर असर पड़ना स्वभाविक है। नि:संदेह जगमेल सिंह का सरेआम कत्ल करने वाले दोषियों को शीघ्र अति शीघ्र सज़ा मिलनी चाहिए।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द