हिन्दी सिनेमा के अनमोल रत्न थे धर्मेन्द्र

बॉलीवुड के ही मैन धर्मेन्द्र के निधन की खबर ने फिल्मी फैन्स को हिलाकर रख दिया है। पचास वर्ष पहले जब शोले रिलीज़ हुई तो धर्मेन्द्र और अमिताभ बच्चन की जोड़ी का पर्दे पर गाया गीत ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे’ से धूम मचाने वाले धर्मेन्द्र के निधन का समाचार मिलते ही उनके चाहने वालों की पहली प्रतिक्रिया थी-दोस्ती तोड़कर धरमजी चले गए। धरमजी के चाहने वाले उन्हें धर्मेन्द्र के साथ ही कई अन्य नामों से भी जानते थे। उनके प्यार में पागल दर्शक उन्हें धरम पाजी, गरम धरम कहकर भी संबोधित करते थे। 8 दिसंबर 1935 को जन्में धर्मेन्द्र ने हर क्षेत्र में अपनी धाक जमाई। फिल्मों के साथ ही वह एक किसान के रूप में भी अपनी पहचान अंतिम समय तक कायम किए रहे। 
धर्मेन्द्र बॉलीवुड के लिए ऐसा नाम थे जिनके विषय में कुछ भी कहना, कम ही होगा। उन्होंने न सिर्फ फिल्मों में अभिनेता के रूप में खुद को स्थापित किया बल्कि अपने पुत्र सनी और बॉबी को भी दर्शकों के प्रेम में अभिभूत देखा। पूरी ज़िंदगी हंसी को जीने वाले धर्मेन्द्र ने हर प्रकार के रोल किए, उनके डायलॉग आज भी हर कहीं सुने जा सकते हैं, उनके द्वारा की कॉमेडी दर्शकों को हंसा-हंसाकर पागल कर देती है, उनके द्वारा विलेन को पीटने के दृश्य में दर्शक जोर से चिल्लाने लगते थे-धरम, और मार साले को.., धर्मेंद्र-हेमा मालिनी की जोड़ी फिल्मों की सबसे अधिक पसंद की जाने वाली और सफल जोड़ियों में गिनी जाती है, वह एक राजनेता भी रहे और उनके निर्माता होने की बात भी सबसे अलग रखती है उन्हें। 
धर्मेन्द्र ने अपने जीवन में जिस भी क्षेत्र में पारी खेली वहां से वह विजयी होकर ही निकले। उन्होंने पूरे जीवन में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया और स्वप्न सुंदरी हेमा मालिनी के साथ उन्होंने सर्वाधिक फिल्में कीं, वह भी अधिकांश सफल या सुपर-डुपर हिट रहीं। उनकी जोड़ी हेमा के साथ ही राखी गुलजार, आशा पारेख, मुमताज, मीना कुमारी, शर्मिला टैगोर, सायरा बानू, जया बच्चन, जीनत अमान, अनीता राज के साथ भी खूब पसंद की गई। 1975 की शोले में वह हेमा मालिनी के साथ जिस तरह से मसखरी करते नज़र आए, वह अभूतपूर्व है। उनके दो डायलॉग तो आज भी बच्चे भी दोहराते हैं। ‘देख, वसंती इन कुत्तों के सामने मत नाचना’ ‘और यूं कि कह तो हम ये रहे थे कि...’। इसके साथ ही इसी फिल्म में जब वह हेमा मालिनी को पिस्तौल चलना सिखाते हैं तो दृश्य अभी तक दर्शकों को याद है और उसका डायलॉग-तुम्हें पिस्तौल चलना सीखना है, तो यूं ही खड़े रहा, दो दिन में सीख जाओगी। शोले ही क्यों हेमा मालिनी के साथ चरस फिल्म को कौन भूल सकता है। इसका गीत ‘कल की हसीं मुलाकात के लिए’ और ‘आजा तेरी याद आई’ अपने दौर में हर गली में और उसके मोड़ पर सुनाई पड़ते थे। 
धर्मेन्द्र और हेमा मलिनी ने जितनी भी फिल्में की, वह भले ही सभी हिट नहीं रही हों, पर उनकी चर्चा खूब रही। उनकी जोड़ी की कुछ फिल्में हैं-शोले, सीता और गीता, राजा-जानी, चरस, नया जमाना, पत्थर और पायल, चाचा-भतीजा, आसपास, दोस्त, मां तथा तुम हसीन मैं जवान आदि। जीनत अमान के साथ धरमवीर, मुमताज के साथ लोफर, मेरा गांव मेरा देश में आशा पारेख, जीवन-मृत्यु, चुपके चुपके, ब्लैकमेल में राखी गुलजार, बहारें फिर भी आएंगी में तनुजा और माला सिन्हा, यकीन में शर्मिला टैगोर के साथ उनकी जोड़ी खूब पसंद की गई। चुपके चुपके में तो वह चौकीदार-ड्राइवर के रोल में पूरी फिल्म की वाहवाही लूट ले गए। धर्मेन्द्र ने मीना कुमारी के साथ भी कई फिल्में कीं। इनमें काजल, पूर्णिमा और फूल और पत्थर एवरग्रीन श्रृंखला में रख सकते हैं। धर्मेन्द्र का मीना कुमारी के साथ फूल और पत्थर में एक ऐसा दृश्य है, जो उस समय खासा चर्चा में रहा। इसमें धर्मेन्द्र खुद को यह सिद्ध करने का प्रयास करते हैं कि वह शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि हर तरह से इंसानियत से भरे हुए एक उदार दिल के मालिक हैं। 
धर्मेन्द्र ने एक बार एक साक्षात्कार में कहा-बॉलीवुड तो ग्रेट मीडिया है। यहां पर कोई किसी दूसरे के लिए नहीं बल्कि खुद के लिए सजता-संवरता है, खुद के लिए ऐसी पृष्ठभूमि तैयार करता है, जिससे वह सबसे अलग लगे। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि वह कभी किसी को चोट पहुंचाने के लिए नहीं अपितु इस लिए नाराज़ होते हैं कि कहीं कुछ गलत हो रहा है। धर्मेन्द्र की अभिनेत्रियों और उनकी फिल्मों के साथ ही अगर उनकी ज़िंदगी में उनके परिवार को समझें, तो यह एक महज इत्तेफाक है कि खुद उनकी फिल्म बंदिनी भले ही हिट की श्रेणी में नहीं आती पर उनको इससे खास लाभ मिला और सनी देओल की ‘बेताब’, बॉबी देओल की ‘बरसात’ ने सुपर हिट फिल्मों का तमगा अपने नाम किया। यूं इन पिता-पुत्रों की ज़िंदगी में एक ही अक्षर की तीन फिल्मों ने जिस तरह से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उस तरह की फिल्में दूसरे अभिनेता-अभिनेत्रियों के साथ कम ही नज़र आती हैं। धर्मेन्द्र ने अपने दोनों बेटों को भी लॉन्च किया था और ‘बेताब’ तथा ‘बरसात’ दोनों की लॉन्चिंग मूवी भी थीं। 
धर्मेन्द्र की फिल्मों में गीत-संगीत जबरदस्त रहता था। उनके ऊपर फिल्माए गए कुछ गीत तो ग्रेड मीडिया बॉलीवुड के पहले सौ गानों में शामिल किए जा सकते हैं। इनमें लोफर का ‘आज मौसम बड़ा बेईमान है’, मेरा गांव मेरा देश का ‘कुछ कहता है यह सावन’, जीवन मृत्यु का ‘झिलमिल सितारों का’, दो चोर का ‘काली पलक तेरी गोरी’, ब्लैकमेल का ‘पल पल दिल के पास तुम’, कर्तव्य में ‘चंदा मामा से प्यारा मेरा मामा’, शोले का ‘कोई हसीना जब रुठ जाती है’, आसपास का ‘तुम जो चले गए तो’, धरमवीर में ‘ओ मेरी महबूबा’, आया सावन झूम के में ‘साथिया नहीं जाना के जी न लगे’ आदि। फिल्म प्रतिज्ञा में उनके ऊपर फिल्माया गया गीत मैं ‘जट यमला पगला दीवाना’ तो उनकी पहचान बन गया है और सही अर्थों में वह जहां कहीं भी जाते हैं, वहां पर एक बार उसकी डिमांड उनसे की जाती है, ठीक उसी तरह जिस तरह से उनसे कहा जाता है कि एक बार कुत्तों मैं तुम्हारा खून पी जाऊंगा तथा बसंती इन कुत्तों के सामने मत नाचना जैसे डायलॉग सुनाने की मांग होती है। 
जहां तक उन्हें मिले पुरस्कारों की बात है, तो उन्हें जितना जनता से प्यार मिला, जितनी सुपरहिट फिल्में दीं, जितने अधिक वह मशहूर हैं, उतने पुरस्कार उन्हें नहीं मिले। सन् 2012 में उन्हें पद्मभूषण और सन् 1997 में वह फिल्मफेयर का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार पा चुके हैं। वर्ष 2022 के दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए उनका नाम चला पर यहां पर मिथुन चक्रवर्ती बाजी मार ले गए। ऐसे धर्मेन्द्र बीकानेर से सांसद रहे हैं और वह सबसे बड़ा पुरस्कार मानते हैं, जनता का प्यार। धरमजी को नाचना कम आता है, लेकिन उनके नाचने का स्टाइल आज के उन युवाओं के लिए एक मानक है, जो नाच नहीं सकते। वैसे खुद उन्होंने स्वीकार किया था कि वह नाच भले ही नहीं पाएं पर जैसा वह नाचते हैं, वह उनके जीवन का वही खिलंदड़पन स्टाइल है, जिसमें वह जीते रहे।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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