देश में बढ़ रहा लापता होने वाले लोगों का आंकड़ा

रहस्यमय ढंग से लापता होते लोगों को धरती निगल रही है या आसमान खा रहा है? ये सवाल पिछले कुछ महीनों से सभी के जुबान पर है। यह मामला अनसुलझी पहेली जैसा बना हुआ है। भारत में गायब लोगों के आंकड़ों में करीब 42 फीसदी का इजाफा हुआ है जो अपने आप में अचंभित करता है। गत सप्ताह आई ‘नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो’ की रिपोर्ट में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। रिपोर्ट की माने तो इस साल पूरे देश में एक लाख 16 हज़ार से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। इजाफे की गति ने ही वैश्विक स्तर पर लापता लोगों के मामले में भारत को दूसरे पायदान पर ला दिया है। गुमशुदगी में राजधानी दिल्ली अव्वल है लेकिन अछूता कोई प्रदेश नहीं है। चाहे मैदानी राज्य हों या पहाड़ी, हर जगह से लोग नियमित गायब हो रहे हैं। दुख यह कि बरामदगी का आंकड़ा बहुत कम है। 
उत्तराखंड के हालात तो और भी खराब बताए गए हैं। वहां रोज़ाना तीन लोग रहस्यमय तरीके से गायब हो रहे हैं। उनकी भी बरामदगी दर बहुत कम है। असंख्य लोगों का गायब होना और किसी का सुराग न लगना अपने आप में चौकाता है जबकि वर्षों से निर्धन या अति पिछड़े देशों में गायब लोगों के संबंध में हम सुनते आते थे जिनमें अफगानिस्तान,  पाकिस्तान, बाग्लादेश, योगांडा व कुछ अफ्रीकी देश शामिल थे। लोगों के गायब होने खतरा भारत में एकाध दशकों से ज्यादा मंडराने लगा है। मेघालय, सिक्किम जैसे शांत प्रदेशों तक से लोग लापता हो रहे हैं। दिल्ली में इसी साल पिछले मात्र 210 दिनों में 8 हज़ार के करीब लोग गायब हुए हैं जिनमें सिर्फ  290 लोग ही खोजे जा सके हैं। सवाल उठता है कि लोग जाते कहां हैं?
गुमशुदगी संबंधी विभिन्न प्रदेशों की सरकारों से लेकर प्रशासन और पुलिस विभाग भी अनोखी थ्योरी को सुलझाने में नाकाम हो रहा है। खोजबीन और तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जांच-पड़ताल बेनजीता साबित हो रही है। गुमशुदगी के ताज़ा आंकड़े एनसीआरबी के अलावा ‘ज़ोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क’ (जिपनेट) ने भी जारी किए हैं जिनसे न सिर्फ  शासकीय विभागों में खलबली मची है बल्कि जनमानस में भी भयभीत है। जहां पर आंकड़े बड़े बताए गए हैं, वहां के निवासी कुछ ज्यादा ही डरे हुए हैं। उन्हें अपनी और अपने परिजनों की चिंता समाने लगी है। आंकड़ों में ऐसे अनगिनत नौनिहाल भी हैं जो या तो पार्कों में खेलने गए या ट्यूशन से वापस ही नहीं लौटे। बिहार, पंजाब, राज्यस्थान, तेलंगाना, हरियाणा में 2022-23 और 2023-24 के आंकड़ों में 22 फीदसी बढ़ोतरी भी चिंता बढ़ाती है।
गायब लोगों के प्रस्तुत आंकड़ों में जिपनेट ने एक और डरावनी बात कही है। लापता लोगों के जितने भी शव पुलिस को बरामद हुए, उसमें चौकाने वाली बात ये निकली कि उनमें से ज्यादातर शवों में किडनियां गायब मिली। यह मामला सीधे-सीधे मानव तस्करी और किडनी गैंग से जुड़ा हो सकता है। समय-समय पर ऐसी खबरें आती ही रहती कि बड़े अस्पतालों में अप्रत्यक्ष रूप से किड़नी गिरोह सक्रिय हैं जो किडनियों की मांग को पूरा करने के लिए बुजुर्गों, मज़दूरों, विक्षिप्तों और निर्बलों को टारगेट करते हैं। किडनी चोर का बड़ा गैंग कुछ वर्षों पहले बेनकाब भी हुआ था जिसके आका को पुलिस ने नेपाल में पकड़ा था। 2024-25 के लापता आंकड़ों में पश्विम बंगाल और असम के हालात तो और भी भयावह बताए गए हैं। गुमशुदगी के आंकड़े वैसे तो देश भर से सालाना या महीनों के हिसाब से पेश होते ही हैं जिनमें एकाध या दर्जन भर लोगों के ही गायब होने की सूचनाएं होती हैं।
गौरतलब है कि गायब लोगों के मामलों में दिल्ली का आंकड़ा बेहद चिंताजनक है। 1 जनवरी से लेकर 23 जुलाई 2025 के बीच 7 हज़ार 880 लोग गायब हुए हैं। इससे केंद्र सरकार भी चिंतित है। इस अपराध को किसी भी सूरत में रोकना होगा। लापता लोगों के परिजन पुलिस थानों के चक्कर काटते हैं। मामले फाइलों में धूल फंकते रहते हैं। परिजन खुद से भी कोशिश करते हैं परन्तु सफलता उन्हें भी नहीं मिलती। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्रत्येक घंटे में 88 महिलाएं, बच्चे और पुरुष गायब हो रहे हैं। 2022 से लेकर 2024 के बीच इन आंकड़ों में बेहताशा वृद्धि हुई। ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले महानगरों में गति ज्यादा है। लापता लोगों में सर्वाधिक संख्या बच्चों और महिलाओं की है।
गायब हुए लोगों के आंकड़ों को जिपनेट जैसी विश्वसनीय संस्था ने उजागर किया हैं जो इस क्षेत्र में माहिर बताई जाती है। संस्था एक केंद्रीकृत डेटाबेस है जिनके आंकड़ों का प्रयोग पुलिस, कोर्ट और जांच एजेंसियां करती हैं। अज्ञात शवों का डाटा भी उनके पास होता है। संस्था विभिन्न थानों, सरकारी संस्थाओं और प्लेटफार्मों से डाटा एकत्र करती है। जिपनेट के आंकड़ों पर एनसीआरबी की रिपोर्ट ने भी मुहर लगा दी है।
सरकार का कहना कि भारत विशाल जनसंख्या वाला देश है, इसलिए ये आंकड़े बड़े लगते हैं, परन्तु यह चिंता व्यक्त करने का मुकम्मल तरीका कतई नहीं हो सकता। एक भी व्यक्ति के गायब होने से सिस्टम की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगता है। सुरक्षा तंत्र को चौकन्ना करना होगा। दोषियों ढूंढ कर उन पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी। यह एक ऐसी समस्या है जिस पर सभी को गंभीरता से विमर्श करने की आवश्यकता है। (अदिति)

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