खुदरा महंगाई दर फरवरी में 3.21 प्रतिशत पर पहुंची
जनवरी में खुदरा महंगाई दर यानी सीपीई 2.75% थी, जो फरवरी में बढ़कर 3.21% हो गई है। यह बढ़ोतरी शहरों के मुकाबले गांवों में ज्यादा महसूस की जा रही है। फरवरी में ग्रामीण महंगाई दर 3.37% और शहरी महंगाई दर 3.02% दर्ज की गई। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि यह आंकड़ा अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4% के लक्ष्य से नीचे है।
सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार देश में महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण खाने-पीने की चीजें हैं। फरवरी में खाद्य महंगाई दर तेजी से उछलकर 3.47% हो गई है, जो जनवरी में 2.13% थी। आम आदमी के लिए रहना और खाना लगातार महंगा होता जा रहा है। हाउसिंग की बात करें तो महंगाई 2.05% से बढ़कर 2.12% हो गई है। ईंधन और लाइट कैटेगरी में महंगाई दर 0.14% रही। स्वास्थ्य सेवाओं की महंगाई 2.19% से गिरकर 1.90% पर आ गई है। वहीं कपड़े और जूतों की महंगाई दर भी जनवरी के 2.98% से घटकर 2.81% रह गई है।
ईरान संकट के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के पास व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल व्यापार गुजरता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि लंबे समय तक सप्लाई बाधित रहने से भारत जैसे ऊर्जा पर निर्भर देशों में आयातित महंगाई का खतरा बढ़ जाएगा। इक्रा (आईसीआरए) की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार, अगर कच्चे तेल के दाम 10% बढ़ते हैं और इसका असर सीधे पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर पड़ता है, तो खुदरा महंगाई 0.40% से 0.60% तक बढ़ सकती है।

