पेड़ के लिए


नंदनपुर नामक राज्य बहुत ही हरा-भरा, खुशहाल तथा सुंदर था। वहां के राजा थे आदित्य सेन। प्रजा की देखभाल में वह कोई कसर नहीं छोड़ते थे। यह देखकर राजकुमार विवेक सिंह भी राज्य के कामकाज में रुचि लेने लगा। एक दिन कुछ व्यापारी राज्य में आए। सभी परेशान थे। उन्होंने कहा, महाराज जंगल में कई पेड़ कटे हुए हैं। आप जांच की आज्ञा दें।
राजा ने गुप्तचरों को जांच पर लगा दिया परन्तु वे चोरों को पकड़ने में असफल रहे। एक दिन राजा दरबार में बैठे थे। उन्होंने कहा, ‘क्या राज्य में कोई भी ऐसा नहीं है, जो इन चोरों को पकड़ सके। क्या इसके लिए भी हमें ही जाना होगा?’ दरबार में सन्नाटा छा गया। किसी ने कुछ नहीं कहा। तभी राजकुमार उठा। वह बोला, ‘महाराज मुझे आज्ञा दें। मैं दोषियों को पकड़कर आपके सम्मुख ले आऊंगा।’
महाराजा ने मना किया परन्तु राजकुमार नहीं माना। राजकुमार ने ब्राह्मण का वेश बनाया। वह घूमता हुआ जंगल में जा पहुंचा। घूमते-घूमते एक झोंपड़ी के पास पहुंचा। राजकुमार ने देखा, एक लड़की कोने में बैठी रो रही है।
‘तुम कौन हो? रो क्यों रही हो?’ ब्राह्मण बने राजकुमार ने पूछा। 
लड़की ने कहा, मेरा नाम चम्पा है। जंगल के कई पशु-पक्षी मेरे मित्र हैं। परन्तु अब वे यहां नहीं रह पाएंगे। मंत्री और उसके आदमी चुपचाप पेड़ काटकर, पड़ोसी राज्य में बेच आते हैं।  हमें चेतावनी दी है कि यदि हमने किसी को कुछ बताया, तो वह हमें गिरफ्तार करवा देंगे।’ राजकुमार ने देखा, चम्पा के पास एक हिरन भी था। राजकुमार ने हिरन को प्यार किया। फिर बोला, ‘आज के बाद मंत्री व उसके आदमी पेड़ नहीं काट सकेंगे।’
चम्पा ने राजकुमार को खाने के लिए फल दिए। राजकुमार विवेक सिंह महल लौटा। राजा को सच्चाई बताई। कुछ विश्वस्त साथियों के साथ जंगल में आया। जैसे ही मंत्री के आदमी पेड़ काटने आए, उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया गया। (उर्वशी)