बार-बार होते रेल हादसे ज़िम्मेदारी तय करने की ज़रूरत


देश में गत वर्षों के दौरान हुए भीषण और दर्दनाक रेल हादसों की शृंखला में एक और दुखद हादसा हो गया है। पलों में ही दर्जनों लोगों की मौतें और सैकड़ों के गम्भीर रूप में घायल होने ने एक बार भारतीय रेलवे की कारगुज़ारी पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। केन्द्र सरकार द्वारा गत समय के दौरान रेलवे को आधुनिक पथ पर चलाने के दावे किए जाते रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी अनेक योजनाएं बनाई जाती रही हैं। यहां तक कि प्रधानमंत्री ने बुलेट रेलगाड़ियां चलाने की भी बार-बार बात की है। परन्तु अंग्रेज़ों की बिछाई गई रेल पटरियों में जिस कद्र सुधार होना चाहिए था, वह नहीं हो सका। 
70 वर्ष बीत जाने के बाद रेल हादसे कम नहीं हुए। देश भर में आज भी हज़ारों ही मानव रहित फाटक हैं, जिन पर अक्सर रेल हादसे होते रहते हैं। गत पांच वर्षों में 586 के लगभग हादसे हुए हैं, जिनमें से 53 प्रतिशत हादसे गाड़ियों के पटरी से उतर जाने के कारण हुए हैं। बहुत सारी रेल पटरियां पुरानी हो चुकी हैं, उनकी देख-रेख उस कद्र नहीं की जाती, जिस तरह की होनी चाहिए। रेल पटरियों की मरम्मत के लिए त्रुटि-रहित प्रबंध नहीं है, जबकि समय की ज़रूरत आधुनिक तकनीकी प्रबंधों द्वारा रेल पटरियों की त्रुटियों को दूर करने की है। बहुत सारे हादसों की जांच के लिए कमेटियां बना दी जाती हैं। बाद में उनका क्या बनता है, इस संबंध में कोई पता नहीं चलता। भारतीय रेल ढांचा दुनिया में चौथे स्थान पर है। लाखों ही लोग नित्य दिन रेल में सफर करते हैं। इतने बड़े विशाल प्रबंध की देखभाल, सुरक्षा और नवीनीकरण के भी उसी तरह ठोस प्रबंध किए जाने की ज़रूरत है। कलिंगा- उत्कल एक्सप्रैस नाम की गाड़ी से मुजफ्फरनगर ज़िले में जो हादसा हुआ है, उस संबंधी जो सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं, उनको पढ़-सुन कर बेहद हैरानी और परेशानी होती है। रेल-पटरियों पर कार्य चल रहा हो और संबंधित स्टेशन मास्टर के पास इसकी सूचना तक न हो, और जिन पटरियों की मरम्मत हो रही हो, उन पर रेलगाड़ियां 100 किलोमीटर की तेज़ी से चल रही हों, तो इसको संबंधित कर्मचारियों द्वारा बड़े स्तर पर की गई लापरवाही ही माना जा सकता है। 
इस संबंधी जो प्राथमिक सूचना प्राप्त हुई है, उसके आधार पर रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने जो कड़े कदम उठाये हैं, वह समय की ज़रूरत के साथ-साथ बेहद पर्याप्त भी कहे जा सकते हैं। विभाग से संबंधित बड़े अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की गई है और संबंधित कर्मचारियों को भी प्राथमिक सज़ाओं के भागीदार बनाया गया है। ऐसी लापरवाही जिसमें अनेकों ही परिवार मानवीय जानें जाने से उजड़ गए हैं, संबंधी जवाबदेही तो होनी ही चाहिए। जिस तेज़ी से यह कार्यवाही की गई, उसी तेज़ी से इस संबंधी जांच को भी पूरा किया जाना चाहिए और इसके लिए लापरवाही करने वाले दोषी कर्मचारियों को कड़ी सज़ाओं के भागीदार बनाया जाना चाहिए। इसके साथ-साथ भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर पक्ष से योजनाबंदी की जानी चाहिए, ताकि व्यर्थ ही ऐसे बड़े दुखांत न हो और रेलवे की साख बनी रह सके। 
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द