धावक अमित कुमार ने भारत का सिर ऊंचा किया


अमित कुमार बेहद गरीब  परिवार से संबंध रखते हैं लेकिन अमीरी उसने अभी-अभी भारत की झोली में डाली है। उन पर गर्व किए बिना हम नहीं रह सकते, चाहे पंजाब की सत्तारूढ़ सरकार ने इस खिलाड़ी पर गर्व करने की बजाय चुप्पी धारण कर ली हो।
अमित कुमार का जन्म 20 मार्च, 1999 को लोहे के शहर के तौर पर जाने जाते मंडी गोबिंदगढ़ में पिता कृष्ण देव के घर माता सुभावती की कोख से हुआ। आर्थिक तंगी के कारण अमित का परिवार आर्थिक तौर पर कोई बहुत मजबूत नहीं था। उनके पिता सारा दिन लोहे की फैक्टरी में काम करते थे, इसी से ही घर का गुज़ारा चलता था। अमित कुमार का जन्म होने पर वह दाईं बाजू से पोलियो का शिकार हो गया। घर की गरीबी से दो-चार होकर अमित के पिता ने इसका बहुत इलाज करवाया लेकिन यह सम्भव न हो सका। अमित को बचपन से ही खेलों का शौक था और विकलांग होते हुए भी वह खेल के मैदान में खेलना चाहते थे। गांव के खेल मैदान में जाकर वह दौड़ते और जब लोग उनको देखते तो उनके हौसले की दाद देते थे।
स्कूल जाने पर भी उसने अपने इस शौक को बरकरार रखा और खेलों के मुकाबलों में हिस्सा लेने लगे। एथलैटिक के प्रसिद्ध कोच जगवीर सिंह जौहल की जब नज़र अमित कुमार पर पड़ी तो पंजाब स्पोर्ट्स के ट्रेनिंग डायरैक्टर सुखवीर सिंह ग्रेवाल के प्रयासों से वह दशमेश मार्शल अकादमी श्री आनंदपुर साहिब में अपने कोच जगवीर सिंह जौहल के नेतृत्व में दांव-पेचों को सीखने लगे। उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा यह हुआ कि वह अभी-अभी स्विट्ज़रलैंड में हुई वर्ल्ड पैरा जूनियर चैम्पियनशिप में धावक के तौर पर भाग लेने गये , जिसमें उन्होंने बाकी देशों के खिलाड़ियों को पछाड़ कर 200 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीता और भारत का नाम रोशन किया। यहीं बस नहीं, 400 मीटर दौड़ कर उन्होंने रजत पदक प्राप्त किया। 2017 में ही देश बीजिंग के परिकस शहर में हुई सीनियर वर्ल्ड चैम्पियनशिप में 400 मीटर की दौड़ में हिस्सा लेकर भी उन्होंने रजत पदक पर कब्जा किया। 2017 में ही हुई सीनियर पैरा नैशनल चैम्पियनशिप में भी उन्होंने 100 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
उनके कोच जगवीर सिंह जौहल का कहना है कि अमित कुमार की इस जीत से दशमेश मार्शल अकादमी श्री आनंदपुर साहिब का नाम दुनिया भर में ऊंचा हुआ है और उनको इस होनहार खिलाड़ी पर बहुत गर्व है। उनके कोच ने बताया कि अमित बहुत ही गरीब परिवार से संबंध रखते हैं लेकिन इसके बावजूद भी पंजाब स्पोर्ट्स के डायरैक्टर सुखबीर सिंह ग्रेवाल के प्रयासों से वह उनको 2020 में टोक्यो में होने वाली पैरा ओलम्पिक में लेकर जाएंगे और उनको उम्मीद है कि अमित पैरा ओलम्पिक जीत कर भारत की झोली में स्वर्ण पदक अवश्य डालेंगे। लोहे के शहर मंडी गोबिंदगढ़ के जन्मे और लोहे के साथ लोहा होने वाले पिता का नाम इस होनहार बेटे ने ऊंचा किया है। नि:संदेह घर का गुज़ारा करने के लिए लोहे से लोहा होने वाले पिता ने लोहे जैसा बेटा पैदा करके यह साबित कर दिया है कि दृढ़ विश्वास और बुलंद हौसले हों तो गरीब घरों में भी गौरवशाली खिलाड़ी पैदा होते हैं जिसमें से अमित कुमार का भी एक नाम है।