गौरी लंकेश का अंतिम सम्पादकीय—झूठी खबरें बेनकाब करने वालों को मेरा सलाम



(कल से आगे)
मैंने जिन लोगों के नाम बताए हैं। उन सभी ने हाल ही में कई फेक न्यूज़ की सच्चाई को उजागर किया है। इनके काम से संघ के लोग काफी परेशान हो गए हैं। इसमें और भी महत्व की बात यह है कि ये लोग पैसे के लिए काम नहीं कर रहे हैं। इनका एक ही मकसद है कि फ ासिस्ट लोगों के झूठ की फैक्ट्री को लोगों के सामने लाना।
कुछ हफ्ते पहले बंगलुरू में ज़ोरदार बारिश हुई। उस टाइम पर संघ के लोगों ने एक फोटो वायरल कराया। कैप्शन में लिखा था कि नासा ने मंगल ग्रह पर लोगों के चलने का फोटो जारी किया है। बंगलुरू नगरपालिका बीबीएमसी ने बयान दिया कि ये मंगल ग्रह का फोटो नहीं है। संघ का मकसद था, मंगल ग्रह का बताकर बंगलुरू का मज़ाक उड़ाना। जिससे लोग यह समझें कि बंगलुरू में सिद्धारमैया की सरकार ने कोई काम नहीं किया, यहां के रास्ते खराब हो गए हैं। इस तरह के प्रोपेगैंडा करके झूठी खबर फैलाना संघ का मकसद था। लेकिन ये उनको भारी पड़ गया था क्योंकि ये फोटो बंगलुरू का नहीं, महाराष्ट्र का था, जहां भाजपा की सरकार है।
हाल ही में पश्चिम बंगाल में जब दंगे हुए तो आर.एस.एस. के लोगों ने दो पोस्टर जारी किए। एक पोस्टर का कैप्शन था, बंगाल जल रहा है, उसमें प्रॉपर्टी के जलने की तस्वीर थी। दूसरी फोटो में एक महिला की साड़ी खींची जा रही है और कैप्शन है बंगाल में हिन्दू महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहा है। बहुत जल्दी ही इस फोटो का सच सामने आ गया। पहली तस्वीर 2002 के गुजरात दंगों की थी जब मुख्यमंत्री मोदी ही सरकार में थे। दूसरी तस्वीर में भोजपुरी सिनेमा के एक सीन की थी। सिर्फ  आर.एस.एस. ही नहीं भाजपा के केंद्रीय मंत्री भी ऐसे फेक न्यूज़ फैलाने में माहिर हैं। उदाहरण के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने फोटो शेयर किया कि जिसमें कुछ लोग तिरंगे में आग लगा रहे थे। फोटो के कैप्शन पर लिखा था गणतंत्र दिवस पर हैदराबाद में तिरंगे को आग लगाया जा रहा है। अभी गूगल इमेज सर्च एक नया अप्लिकेशन आया है, उसमें आप किसी भी तस्वीर को डालकर जान सकते हैं कि ये कहां और कब की है। प्रतीक सिन्हा ने यही काम किया और उस अप्लिकेशन के ज़रिये गडकरी के शेयर किए गए फोटो की सच्चाई उजागर कर दी। पता चला कि ये फोटो हैदराबाद का नहीं है। पाकिस्तान का है जहां एक प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन भारत के विरोध में तिरंगे को जला रहा है।
इसी तरह एक टीवी पैनल के डिस्कशन में भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि सरहद पर सैनिकों को तिरंगा लहराने में कितनी मुश्किलें आती हैं, फि र जे एन यू जैसे विश्वविद्यालयों में तिरंगा लहराने में क्या समस्या है? यह सवाल पूछकर संबित ने एक तस्वीर दिखाई। बाद में पता चला कि यह एक मशहूर तस्वीर है मगर इसमें भारतीय नहीं, अमरीकी सैनिक हैं। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमरीकी सैनिकों ने जब जापान के एक द्वीप पर कब्ज़ा किया तब उन्होंने अपना झंडा लहराया था। मगर फोटोशाप के ज़रिये संबित पात्रा लोगों को चकमा दे रहे थे। लेकिन ये उन्हें काफी भारी पड़ गया। ट्विटर पर संबित पात्रा का लोगों ने काफी मजाक उड़ाया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में एक तस्वीर साझा की। लिखा कि भारत में 50,000 किलोमीटर रास्तों पर सरकार ने तीस लाख एल ई डी बल्ब लगा दिए हैं। मगर जो तस्वीर उन्होंने लगाई वो फेक निकली। भारत की नहीं, 2009 में जापान की तस्वीर की थी। इसी गोयल ने पहले भी एक ट्वीट किया था कि कोयले की आपूर्ति में सरकार ने 25,900 करोड़ की बचत की है। उस ट्वीट की तस्वीर भी झूठी निकली। छत्तीसगढ़ के पी डब्ल्यू डी मंत्री राजेश मूणत ने एक ब्रिज का फोटो शेयर किया। अपनी सरकार की कामयाबी बताई। उस ट्वीट को 2000 लाइक मिले। बाद में पता चला कि वो तस्वीर छत्तीसगढ़ की नहीं, वियतनाम की है।
ऐसे फेक न्यूज़ फैलाने में हमारे कर्नाटक के आर.एस.एस. और भाजपा नेता भी कुछ कम नहीं हैं। कर्नाटक के सांसद प्रताप सिन्हा ने एक रिपोर्ट शेयर किया। कहा कि ये टाइम्स आफ  इंडिया मे आया है। उसकी हैडलाइन ये थी कि हिन्दू लड़की को मुसलमान ने चाकू मारकर हत्या कर दी। दुनिया भर को नैतिकता का ज्ञान देने वाले प्रताप सिन्हा ने सच्चाई जानने की जरा भी कोशिश नहीं की। किसी भी अखबार ने इस न्यूज़ को नहीं छापा था बल्कि फोटोशाप के ज़रिए किसी दूसरे न्यूज़ में हैडलाइन लगा दिया गया था और हिन्दू मुस्लिम रंग दिया गया। इसके लिए टाइम्स आफ  इंडिया का नाम इस्तेमाल किया गया। जब हंगामा हुआ कि ये तो फेक न्यूज़ है तो सांसद ने डिलीट कर दिया मगर माफ ी नहीं मांगी। सांप्रदायिक झूठ फैलाने पर कोई पछतावा ज़ाहिर नहीं किया।
जैसा कि मेरे दोस्त वासु ने इस बार के कॉलम में लिखा है, मैंने भी एक बिना समझे एक फेक न्यूज़ शेयर कर दिया। पिछले रविवार पटना की अपनी रैली की तस्वीर लालू यादव ने फोटोशाप करके साझा कर दी। थोड़ी देर में दोस्त शशिधर ने बताया कि ये फोटो फर्जी है। नकली है। मैंने तुरंत हटाया और ग़लती भी मानी। यही नहीं फेक और असली तस्वीर दोनों को एक साथ ट्वीट किया। इस गलती के पीछे सांप्रदायिक रूप से भड़काने या प्रोपेगैंडा करने की मंशा नहीं थी। फासिस्टों के खिलाफ लोग जमा हो रहे थे, इसका संदेश देना ही मेरा मकसद था। फाइनली, जो भी फेक न्यूज़ को एक्सपोज़ करते हैं, उनको सलाम । मेरी ख्वाहिश है कि उनकी संख्या और भी ज्यादा हो। (समाप्त)
(रवीश कुमार के ब्लॉग द्धह्लह्लश्च र्//ठ्ठड्डद्बह्यड्डस्रड्डद्म.शह्म्द्द/ से)