सारागढ़ी के शहीदों को कैप्टन व विभिन्न शख्सियतों द्वारा श्रद्धांजलि भेंट


लंदन, 13 सितम्बर (मनप्रीत सिंह बद्धनी कलां): सारागढ़ी का युद्ध सिख इतिहास व ब्रिटिश इंडिया सेना की ऐसा युद्ध है जिसे आज 120 वर्ष बाद भी सिखों के गौरवमयी इतिहास के रूप में जाना जाता है। 120वीं वर्षगांठ पर गत दिवस लंदन में हुए अंतिम समागम के दौरान कैप्टन अमरेन्द्र सिंह मुख्य मेहमान के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर भारत के उच्चायुक्त वाई.के. सिन्हा व फील्ड मार्शल सर जॉन चैपल जीसीबी सहित प्रमुख शख्सियतें मौजूद थीं। 
मुख्य प्रबंधक हरविंदर सिंह राणा ने स्वागत किया और मेजर बी.एस. कोहली ने कैप्टन अमरेन्द्र सिंह व उनकी पुस्तक ‘सारगढ़ी अते समाना किले दी रक्खेया’ संबंधी जानकारी दी। कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने इस अवसर पर सारागढ़ी के युद्ध व इससे संबंधित घटनाक्रम को एक विशेष प्रोजैक्ट के ज़रिये पेश किया और युद्ध के हर पक्ष को बाखूबी पेश करते हुए सारागढ़ी से संबंधित पुरानी तस्वीरें, शहीदों के विवरण व मौजूदा सारागढ़ी की हालत को दर्शाती तस्वीरों के ज़रिये पहुंचे मेहमानों को सारा हाल पेश किया। युद्ध दौरान उपयोग किए गए हथियारों, हथियारों की संख्या आदि को बाखूबी पेश किया। समागम के अंत में कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने ‘अजीत समाचार’ के प्रतिनिधि के साथ बातचीत करते हुए कहा कि उनकी अन्य पुस्तकों की तरह यह पुस्तक भी पंजाबी भाषा में भी उपलब्ध होगी। अंत में सारागढ़ी व इन समागमों को सफल बनाने के लिए योगदान डालने वाली शख्सियतें हरमिंदर सिंह गिल, गुरपाल सिंह उप्पल व अन्यों का विशेष रूप से आभार जताया गया और वर्ल्ड कैंसर केयर द्वारा पंजाब में निभाई जा रही सेवाओं को मुख्य रखते हुए विशेष सम्मान किया गया, यह सम्मान जसवंत सिंह ग्रेवाल ने प्राप्त किया। इस अवसर पर ‘बोले सो निहाल’ व युद्धों के दौरान लगाये जाने वाले खालसाई नारों से जहां शहीदों को श्रद्धा के फूल भेंट किए गए, वहीं ब्रिटिश आर्मी बैंड से श्रद्धांजलि भेंट की गई।