जैवलिन थ्रो के अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी हैं संदीप कुमार


जैवलिन थ्रो के अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी हैं संदीप कुमार। हरियाणा प्रांत का गौरव संदीप कुमार जिन्होंने कभी भी अपनी विकलांगता को अपने खेल क्षेत्र के बीच में रुकावट नहीं बनने दिया। बल्कि और भी दलेरी और हिम्मत से खेलते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी होने का गौरव हासिल किया। संदीप कुमार का जन्म 10 अप्रैल, 1996 को ज़िला महिन्द्रगढ़ के एक गांव नारनोल में पिता सुभाष चंद्र के घर और माता सुचार देवी की कोख से हुआ। संदीव को बचपन से ही खेलने का शौक था, लेकिन जब वह 12 वर्ष के थे, तो उनके साथ सड़क हादसा हो गया, लेकिन उन्होंने अपनी खेल के प्रति भावना को कम नहीं होने दिया। सड़क हादसे में वह बाएं पांव से विकलांग हो गए। अपनी खेलों के प्रति खेल भावना को जारी रखते हुए, जज्बे और हौंसले की ऐसी उदाहरण पेश कि आज वह विश्व के पैरा-खिलाड़ियों में तीसरे और हाल ही में चौथे स्थान पर हैं। इनका एशिया में पहले स्थान पर कब्ज़ा है। चाहे संदीप नैशनल स्तर पर खेल कर अनेकों स्वर्ण पदकों पर अपना नाम लिख चुके हैं, परन्तु वर्ष 2016 में दुबई में हुए वर्ल्ड कप में उन्होंने भाग लिया। 51.48 मीटर जैवलिन थ्रो को फैंक कर उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त करके भारत का सिर गर्व से ऊंचा किया।
वर्ष 2016 में ही बर्लिन देश में हुए विश्व स्तरीय खेलों में 53.71 मीटर में भी पहला स्थान हासिल करने में वह कामयाब रहे। संदीप को ही नहीं बल्कि देश को भी यह गौरव जाता है कि संदीप ने रियो ब्राज़ील में वर्ष 2016 में हुए पैरा-ओलम्पिक में 54.48 मीटर जैवलिन थ्रो को फैंक कर चौथा स्थान हासिल किया। पैरिस में हुई ग्रैंड प्रिक्स में दूसरा स्थान और लंदन में हुई पैरा वर्ल्ड चैम्पियनशिप में पांचवां स्थान प्राप्त करके अपनी जीत के झंडे गाड़े हुए हैं। आजकल संदीप कुमार अपने कोच नवल सिंह जोकि खुद द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता हैं, से कोचिंग लेकर एशियन खेलों की तैयारी में जुटे हैं। संदीप का कहना है कि वह हमेशा ऋणी रहेंगे। अपने कोच नवल सिंह का, जिनके नेतृत्व में ही वह जैवलिन थ्रो में आज उच्च मुकाम  को हासिल कर सके हैं। संदीप ने कहा कि सरकार विशेष तौर पर पैरा खिलाड़ियों को विशेष सुविधाएं प्रदान करें, क्योंकि पैरा खिलाड़ी विकलांग होता हुआ भी देश के नाम को ऊंचा करता है और वह भी दूसरे खिलाड़ियों से कम नहीं। मेरी शुभकामनाएं संदीप के साथ हैं कि वह देश के लिए और खेल कर देश के नाम को चमकाएं।