आबे आए, बुलेट ट्रेन लाए


अहमदाबाद, 13 सितम्बर (वार्ता): जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने आज से अपनी दो दिवसीय गुजरात यात्रा की शुरूआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ खुली जीप में करीब 8 किलोमीटर लंबे एक भव्य रोड शो के साथ की जिस दौरान उन्होंने तथा उनके साथ मौजूद उनकी पत्नी अकी आबे ने भारतीय परिधान पहन रखे थे। कल दोनों नेता एक लाख करोड़ रुपए से अधिक के लागत वाली मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास करेंगे। दोनों ने बाद में यही परिधान पहन कर यहां पुराने शहर में स्थित 16वीं सदी के वास्तुकला का बेजोड़ नमूना कहे जाने वाले संरक्षित मस्जिद सिदी सैयद नी जाली का भी श्री मोदी के साथ अवलोकन किया। शाम को सूरज की किरणें पड़ने से बेहद सुंदर लगने वाली इस मस्जिद की वास्तुकला और इतिहास तथा इसके संरक्षण के बारे में श्री मोदी ने आबे दंपति को बताया। उन्होंने वहां इसके तथा अहमदाबाद को हाल में यूनेस्को की ओर से भारत का पहला विश्व विरासत शहर घोषित किये जाने के बारे में एक प्रस्तुतीकरण भी देखा। इसके बाद वे पास ही स्थित बुटीक हेरीटेज होटल हाउस ऑफ मंगलदास गिरधरदास (स्थानीय तौर पर अगासिये होटल के रूप में मशहूर) में गये जिसकी छत पर श्री मोदी की ओर से श्री आबे के सम्मान में दिये रात्रिभोज में करीब एक सौ चुनिंदा व्यंजन परोसे गये।
इससे पहले करीब आधे घंटे के आठ किमी लंबे रोड शो के दौरान हवाई अड्डे से साबरमती आश्रम तक हज़ारों लोगों की भीड़ ने आबे दंपति और श्री मोदी अभिवादन किया। श्री आबे ने नीले रंग की कोटी और मलाईनुमा ऊजले रंग का कुर्ता पायजामा पहन रखा था और वह बहुत जंच रहे थे। जब वह विमान से उतरे थे तो सूट पहन रखा था। पश्चिमी परिधान पहन कर आयी श्रीमती आबे ने भी रोड शो में एक कंधे पर दुपट्टे के साथ मरूननुमा लाल रंग का कुर्ता और नीचे से चौड़ी सलवार पहन रखी था। श्री मोदी, श्री आबे और श्रीमती आबे लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादन करते रहे। इस दौरान देश के 28 राज्यों के कलाकारों और नर्तकों ने उनका स्वागत करते हुए प्रस्तुति भी दी। यह भारत में दो प्रधानमंत्रियों का अब तक पहला ऐसा संयुक्त रोड शो था। रोड शो साबरमती रिवरफ्रंट तथा सुभाष ब्रिज और आरटीओ सर्किल होते हुए साबरमती आश्रम पहुंचा। इसके बाद तीनों ने पारंपरिक रूप से महात्मा गांधी के वहां के मूल निवास हृदय कुंज में पारंपरिक अंदाज में उनके तैल चित्र को सूत की माला पहनाई। बापू के प्रिय भजनों के बीच तीनों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प चढ़ाये। रोड शो और आश्रम में श्री मोदी आबे दंपति को कई चीज़ों के बारे में खुद जानकारी देते दिखे। उन्होंने गांधीजी के चरखे और जापानी संस्कृति से सरोकार रखने वाले तीन बंदरों की गांधीजी की प्रिय मूर्ति जो बुरा नहीं बोलने,नहीं देखने और नहीं सुनने का संदेश देते हैं के बारे में भी बताया। 
श्री मोदी ने आबे दंपति के साथ आश्रम में गांधीजी के चरखे के साथ तस्वीर भी खिंचाई। वे वहां से दिखने वाले साबरमती रिवरफ्रंट के हिस्से की तरफ एक चबूतरे पर थोड़ी देर तक कुर्सियों पर बैठे। आबे दंपति ने आश्रम की आगंतुक पुस्तिका में हस्ताक्षर भी किए और जापानी लिपि में इस पर प्रेम और धन्यवाद शब्द लिखे। साबरमती नदी के किनारे के इस आश्रम में गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद 1930 के दांडी कूच तक लंबा प्रवास किया था। इससे पहले आज टोक्यो से विशेष विमान से सीधे यहां पहुंचे श्री आबे का उनसे थोड़ी देर पहले ही नई दिल्ली से आये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ कर खुद हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी की।