अमरीका में आतंकवादी हमला साझी नीति ही है एकमात्र रास्ता


अमरीका के शहर लॉस वेगास में एकाकी आतंकवादी द्वारा किये गये नर-संहार ने जहां पूरे विश्व को स्तब्ध किया है, वहीं वैश्विक धरातल पर अमीबा की भांति बढ़ते जाते आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक रूप से मिल कर लड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया है। यह घटना शहर के एक बड़े होटल में हुई, जहां 32वीं मंज़िल की ऊंचाई से आतंकवादी ने सबसे नीचे वाले संगीत कक्ष में अंधाधुंध फायरिंग की जहां एक बड़े संगीत समारोह का आयोजन किया गया था, जिसमें उस समय हज़ारों श्रोता बैठे थे। इस गोलीबारी में 58 लोग मारे गये, जबकि 500 से अधिक घायल भी हुए हैं। हमलावर मानसिक रूप से किस तरह तैयार होकर आया था, इसका अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उसने दस बन्दूकों से मैगज़ीन बदल-बदल कर सैकड़ों गोलियों की भीषण वर्षा की। अंत में हमलावर ने स्वयं को भी गोली मार कर आत्म-हत्या कर ली। बेशक इस नर-संहार की ज़िम्मेदारी एक आतंकी संगठन ने ली है, परन्तु गुप्तचर सूत्रों के अनुसार हमलावर एक स्थानीय नागरिक है, जिसने बाकायदा एक सुनियोजित तरीके से इस नर-संहार को अंजाम दिया। यह घटना इतने अप्रत्याशित ढंग से हुई कि अधिकतर लोगों को पता ही नहीं चला कि आखिर हो क्या रहा है। एकाएक आकाश की ओर से गोलियां बरसने लगीं और ज़मीन पर बहते रक्त के साथ लोग भी मरने लगे।
इस एक घटना ने यह भी सिद्ध किया है कि वैश्विक धरातल पर आतंकवाद किस सीमा तक भयानक एवं भयावह हो चुका है। यह भी देखने वाली बात है कि अल-कायदा, लश्कर और आई.एस. के नाम-ध्वज तले आतंकवाद विश्व के किसी भी छोटे-बड़े देश पर आतंकवादी कहर बरपा करने में कितना समक्ष हो गया है। वर्ष 2001 में 11 सितम्बर को अमरीका के न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सैंटर के दो सर्वाधिक ऊंचे जुड़वां भवनों को विमानों की टक्कर से धराशायी किये जाने के बाद से तो आतंकवादियों का हौसला निरन्तर बुलंद होते चला गया है। भारत में मुम्बई जैसे महानगर को कई बार सीरियल बम-विस्फोटों से दहलाने के साथ-साथ दिल्ली में संसद भवन पर भी आतंकवादी हमला हुआ। विदेशों की बात करें, तो अमरीका के साथ-साथ ब्रिटेन, कैनेडा, फ्रांस और इटली आदि में अनेक ऐसी आतंकवादी घटनाएं घटी हैं, जिन्होंने बार-बार विश्व समुदाय को आतंकवाद के फैलते जाते अजगर-मुख को बंद करने के प्रति सचेत किया है। बेशक अब तक के आतंकवाद से सर्वाधिक पीड़ित भारत ही हुआ है, परन्तु अमरीका में न्यूयॉर्क टॉवर्स पर हुए हमले से पूरे विश्व के बड़े शक्तिशाली देशों के पांवों के नीचे की ज़मीन एक- बारगी हिल गई थी। 
अमरीका में गोलीबारी की घटनाएं प्राय: होती रहती हैं। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि वहां आत्म-रक्षा के नाम पर हथियारों के लाईसैंस लेना अथवा हथियार रखना बेहद आसान प्रक्रिया है। अमरीका के स्कूलों और कालेजों में भी गोलीबारी की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। इनका कारण भी वहां हथियारों को रखने की अत्यधिक सरल प्रक्रिया को ही माना जाता है। पिछले वर्ष भी अमरीका में आतंकवाद की कई घटनाएं हुईं, जिनमें वाशिंगटन के एक मॉल में हुई गोलीबारी में पांच लोग मारे गये थे। जुलाई, 2016 में भी एक बंदूकधारी ने पांच अमरीकी पुलिस अधिकारियों की हत्या कर दी थी। इंग्लैंड की भूमिगत रेलगाड़ी में विस्फोट भी आतंकवादी घटना थी। ब्रिटेन में इसी वर्ष चार महीनों में चार बड़ी आतंकवादी घटनाएं हुईं, जिनमें 34 व्यक्ति मारे गये। इसी प्रकार फ्रांस में पिछले वर्ष नीस में राष्ट्रीय दिवस मना रहे लोगों पर विस्फोटकों से भरा ट्रक चढ़ा दिये जाने से 84 व्यक्तियों की मौत हो गई थी।
अब अमरीका के लॉस वेगास में हुए हमले की घटना ने एक बार फिर अमरीका को तो दहलाया ही है, पूरी दुनिया में शांति चाहने वाले देश भी इस घटना से अचम्भित हुए हैं। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस घटना को शैतान का कार्य बताया है, परन्तु इस शैतान के मुंह में लगाम डालने के लिए पूरे विश्व के देशों को नियोजित तरीके से सामूहिक कार्रवाई करनी होगी। आतंकवादियों का न कोई देश होता है, न कोई धर्म। वे जैसे भी चाहें और जहां भी चाहें, प्रहार कर सकते हैं। मानवता का रक्त बहाना ही इनका एकमात्र शुगल होता है। आतंकवाद आज इतना शक्तिशाली और विशाल हो गया है कि किसी एक देश के लिए इस पर काबू पाना असम्भव नहीं, तो बेहद कठिन अवश्य है। इसे सम्भव बनाने के लिए सभी बड़े और खास तौर पर आतंकवाद से पीड़ित देशों को एक मंच पर आना होगा, और मिल कर इसके विरुद्ध जंग शुरू करना होगी। 9/11 की घटना के बाद अमरीकी लोगों के मन-मस्तिष्क पर यह दूसरा बड़ा प्रहार है। नि:संदेह इसकी पीड़ा बड़ी देर तक और बड़ी दूर तक सुनाई  देती रहेगी। हम समझते हैं कि इस घटना ने विश्व समुदाय को एक और मौका प्रदान किया है कि वे आतंकवाद के दैत्य को मिल कर कुचलने हेतु आगे आएं। वैश्विक जनमत जितनी शीघ्र इस आवश्यकता को महसूस करेगा, मानवता और मानवीयता के लिए यह उतना ही अच्छा होगा।