श्री हेमकुंट साहिब के कपाट बंद




देहरादून, 10 अक्तूबर (कमल शर्मा): सिखों के विश्व प्रसिद्ध पावन धाम सचखंड श्री हेमकुण्ट साहिब के कपाट दोपहर बाद अरदास के उपरांत संगतों के दर्शनार्थ शीत काल के लिए बंद कर दिए गए। प्रात: 10:30 बजे से प्रारंभ हुए पंचम पातशाह श्री गुरू अर्जन देव जी की पावन वाणी, सुखमणि साहिब के पाठ के उपरांत भाई कंवरपाल सिंह जी के जत्थे ने गुरुबाणी के मनोहर कीर्तन द्वारा संगतों को निहाल किया। इसके बाद गुरुद्वारा श्री हेमकुण्ट साहिब के मुख्य ग्रंथी भाई मिलाप सिंह द्वारा अरदास की गई तथा गुरुबाणी हुकुमनामे के बाद पंज प्यारों की अगुवाई व देश-विदेश से आई हज़ारों संगतों की उपस्थिति में आर्मी बैंड की गुरुबाणी शब्द कीर्तन के बीच श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप को सुखासन करके बड़े  ही हर्षोल्लास व शानो-शौकत से सचखंड तक लाया गया। सुबह से ही गुरुघर में संगतों की आमद शुरू हो गई व गुरुबाणी के पाठ व कीर्तन के प्रवाह चलते रहे। गुरु के लंगर गुरु संगतों के द्वारा बड़ी सेवा भावना, हर्षोल्लास के साथ छकाए गए। गुरुद्वारा श्री हेमकुण्ट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के प्रधान स. जनक सिंह व उप प्रधान स. नरेन्द्रजीत सिंह ने बताया कि इस बार श्री हेमकुण्ट साहिब की यात्रा, वर्ष 2013 में आई भीषण आपदा के बाद सबसे ज्यादा सुखद रही। ढाई लाख से अधिक देश-विदेश से आई संगतों ने दर्शन कर गुरुघर की खुशियां प्राप्त कीं। उन्होंने बताया कि यात्रा को सफल बनाने में उत्तराखण्ड की सरकार व पूरे प्रशासन का भी विशेष सहयोग रहा और भविष्य में भी श्री हेमकुण्ट साहिब जी की यात्रा को सफल बनाने हेतु सरकार और प्रशासन का सहयोग मिलता रहेगा।