सरकार वायुसेना में कमियों को दूर करने हेतु प्रतिबद्ध : रक्षा मंत्री




नई दिल्ली, 10 अक्तूबर (भाषा): रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज कहा कि पिछले दशक में समय पर फैसला नहीं लेने  के चलते वायुसेना में कुछ कमियां पैदा हुई, जिन्हें दूर करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। वायुसेना कमांडरों के अर्द्धवार्षिक सम्मेलन में रक्षा मंत्री ने कहा कि सशस्त्र बलों की ज़रूरी क्षमताओं को हासिल करने के लिए बल के प्रमुखों को दी गई शक्तियों का पूरा उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में समय पर फैसला लेने के अभाव के चलते पैदा हुई कमियों को दूर करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। क्षेत्रीय सुरक्षा के उभरते परिदृश्य और चीन-भारत सीमा के कुछ हिस्से में चीन के बढते आक्रामक रुख के बीच वायुसेना कमांडरों का यह तीन दिवसीय सम्मेलन हो रहा है। वायुसेना ने एक बयान में कहा कि सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए सीतारमण ने यह भी कहा कि बजटीय आवंटन को अड़चन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए और जो पूरी तरह से जरुरी है उसे प्राप्त करने पर गौर किया जाना चाहिए। फिलहाल वायुसेना में 33 फाइटर स्कैवड्रन हैं जबकि इसकी अधिकृत क्षमता 42 स्कैवड्रन है। वायुसेना सरकार से यह पुरजोर अनुरोध कर रही है कि वह लड़ाकू विमानों की खरीद में तेजी लाए ताकि कमी से निपटा जा सके। रक्षा मंत्री ने कहा कि डीआरडीओ और आर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड के साथ वायुसेना को मेक इन इंडिया  कार्यक्रम के तहत स्वदेशीकरण के संभावित क्षेत्रों का आंकलन करना चाहिए। अपने संबोधन में वायुसेना प्रमुख बी.एस. धनोआ ने वायुसेना की ताकत को कायम रखने के लिए लगातार कोशिशों और प्रशिक्षण की जरुरत पर जोर दिया। साथ ही, बल की क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया जारी रखने की अपील की।