बराक ओबामा का संदेश


अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की नई दिल्ली की संक्षिप्त यात्रा ने बढ़िया प्रभाव छोड़ा है। ओबामा 8 वर्ष तक अमरीका के राष्ट्रपति रहे हैं। वह इस सारे समय के दौरान अपने लोगों के लोकप्रिय नेता भी बने रहे और उन्होंने अमरीकी नागरिकों की बेहतरी के लिए कार्य किए। दुनिया भर में उनका अच्छा प्रभाव बना रहा। उन्होंने अपने कार्यकाल में भारत के साथ अपने विशेष प्रेम को बनाये रखा। इस यात्रा के दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा भी की। उनकी पहली भारत यात्राएं भी बेहद भावपूर्ण रही थीं। यहां आकर भी उन्होंने एक अच्छे अर्थशास्त्री डा. मनमोहन सिंह की प्रशंसा की और मोदी को एक अच्छा प्रबंधक बताया। बराक ओबामा खुले विचारों वाले व्यक्ति हैं।  आज अमरीका का समाज बहुत विभिन्नता भरपूर है। अनेक तरह के धार्मिक अकीदों वाले लोग वहां बसते हैं। चाहे गत समय के दौरान अमरीका को आतंकवाद की आंच झेलनी पड़ी परन्तु इसके बावजूद बराक ओबामा ने अपनी नीतियों के संतुलन को बनाये रखा। वह विभिन्नता वाले समाज में प्रत्येक को अपनी बात कहने का अवसर प्रदान करने का प्रयास करते रहे। आज जब दुनिया पर आतंकवाद के बादल छाये हुए हैं, तो भी बराक ओबामा हर बात को सोचकर और हालात की गुणवत्ता के आधार पर अपनी प्रतिक्रिया प्रकट करते रहे हैं। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले अमरीका ने उनके अपने देश का वीज़ा देने पर पाबंदियां लगाई हुई थीं। इसका एक बड़ा कारण गुजरात के मुख्यमंत्री होते हुए उनकी शख्सियत के बारे में बना साम्प्रदायिक प्रभाव था। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी बराक ओबामा ने समय-समय पर नरेन्द्र मोदी के पास इस मामले पर अपने विचार प्रकट किए हैं। राष्ट्रपति के तौर पर उन्होंने अपनी पिछली यात्रा के दौरान भी अपने इन विचारों को छिपाकर नहीं रखा था। कुछ वर्ष पूर्व राष्ट्रपति होते हुए उन्होंने नरेन्द्र मोदी के उस बयान का स्वागत किया था, जिसमें उन्होंने धर्म आधारित हिंसा की निंदा की थी और यह भी कहा था कि भारत सरकार सभी धर्मों का समान सम्मान करती है। तब नई दिल्ली में बराक ओबामा ने अपने एक भाषण में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और सहनशीलता की आवश्यकता के बारे में बात की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत की सफलता एक राष्ट्र के तौर पर एकता में है, न कि धार्मिक आधार पर बांटने में। इसके साथ ही उन्होंने स्मरण करवाया था कि भारत और अमरीका दोनों देशों में अनेकता ही इनकी मजबूती है। आज बराक ओबामा अमरीका के राष्ट्रपति नहीं हैं, परन्तु भारत आने पर उन्होंने एक बार फिर ऐसा ही संदेश दिया है। उन्होंने मोदी सरकार को कहा है कि वह देश के मुसलमानों का सम्मान करें और उनकी ओर ध्यान दें, क्योंकि भारत के अधिकतर मुसलमान इस देश को अपना मानते हैं। उन्होंने यह भी स्मरण करवाया कि उनकी वर्ष 2015 की यात्रा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ धार्मिक सहनशीलता और विश्वासों की आज़ादी के पक्ष में बात की थी। 
नरेन्द्र मोदी के अपने अकीदे और विश्वास हो सकते हैं, परन्तु देश के प्रधानमंत्री के तौर पर उनको अपने वचनों और अमलों द्वारा देश के सभी नागरिकों को समानता का संदेश देना चाहिए और यह भी कि देश की हर समस्या से गुण-दोष के आधार पर ही निपटा जाना चाहिए। यदि अमरीका जैसे बड़े देश के एक समझदार पूर्व राष्ट्रपति भारत की धरती पर आकर ऐसी बात करते हैं तो भारतीय नेताओं को उनकी बात को गम्भीरता से सुनना चाहिए, क्योंकि ऐसा संदेश वही व्यक्ति दे सकता है, जिसका इस देश से लगाव हो। 

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द