अमिताभ बच्च्न की संघर्ष गाथा


सदी के महानायक ‘बिग बी’ अर्थात् अमिताभ बच्चन ने विश्व में जो अलग स्थान अपनी संवाद अदायगी एवं अभिनय के धरातल पर अभूतपूर्व सफलता अर्जित की उसके पीछे उनके संघर्ष की कथा का ताना-बाना भी कम रोचक नहीं है। अमिताभ बच्चन ने ‘आकाशवाणी’ में जब स्वर परीक्षा दी तो इसमें उन्हें सरकारी इकाई के माध्यम ने अनुतीर्ण घोषित कर दिया परन्तु जिस आवाज़ को ‘आकाशवाणी’ ने अनुपयोगी माना आज उसी आवाज़ का समूचा विश्व दीवाना है। संघर्ष के दौर में अमित जी ने मायानगरी में स्थापित होने के लिए कम पापड़ नहीं बेले। जिसके उदाहरणों में उनकी प्रथम फिल्म ख्वाजा अहमद अब्बास की ‘सात हिन्दुस्तानी’ में मात्र सिनेमा स्क्रीन पर भीड़ का हिस्सा, इसके बाद स्वर्गीय सुनील दत्त साहब की ‘रेशमा और शेरा’ में ‘गूंगे’ की भूमिका दो उदाहरण ही मेरे विचार से पर्याप्त हैं। आगे की कहानी जगजाहिर है कि वह कैसे मायानगरी का सूरज व चांद बन कर विश्व में उजाला कर रहे हैं। 

 सतीश शर्मा