श्रमिकों की लाशों के ढेर पर बना रेल ट्रैक डेथ रेलवे


    बहरहाल, जब आपको एहसास होता है कि यह पुल और पटरी अकुशल कार्यबल ने बिना उचित ट्रेनिंग, औजारों व मशीनरी के मात्र 18 माह, असंभव प्रतीत होने वाले समय में बनाया था तो आपको स्वीकार करना होगा कि यह इंजीनियरिंग का चमत्कार है। अगर गौर से देखा जाए तो यह चमत्कार भी नहीं है बल्कि क्रूरता का शानदार नतीजा है, जिससे बदकिस्मती से यह रचना ऐतिहासिक हो जाती है। आप इस पुल पर और पटरी के लकड़ी के फट्टों पर अब भी चल सकते हैं, लेकिन सावधानी से क्योंकि थाईलैंड का रेलवे विभाग अब भी इस ट्रैक पर बैंकाक से नामटोक तक यात्री रेलें चलाता है। वर्तमान टर्मिनस कंचनबूरी से चंद कि.मी. के फासले पर है। बहुत से पर्यटक अल्प ट्रेन यात्रा भी करते हैं ताकि प्राकृतिक नजारों का मजा लिया जा सके, लेकिन कुछ पर्यटक ऐसा करने से बचते हैं क्योंकि उन्हें लाशों पर यात्रा करना पसंद नहीं है।
स्मारक, म्यूजियम व कब्रिस्तान जो इस रेलवे लाइन के आसपास हैं, वह कंचनबूरी की विरासत बन गए हैं। थाई-बर्मा रेलवे सेंटर और हेलफायर पास म्यूजियम, जो कि ऑस्ट्रेलिया सरकार की पहल है, के सहयोग से अनेक प्रदर्शनी फोटोग्राफ, कागजात आदि की भी लगी हुई हैं, जो कि इन श्रमिकों को श्रद्धांजलि है। ज्यादातर फोटो कंकालों के हैं, जिन्हें देखकर दिल भर आता है। इन युद्ध बंदियों व श्रमिकों ने लगभग फाका करते हुए इस रेल लाइन को बनाया क्योंकि उनको केवल 150 ग्राम चावल, सूखी सब्ज़ियां व सूखी मछली दिनभर में खाने को दी जाती थी। पहनने के लिए मात्र एक कपड़ा था जिसे कमर में बांध लिया जाता था। इस कपड़े को ‘जैप हैप्पी’ कहते थे।
श्रमिक जैसे ही मरते उन्हें कैंप के मैदान में ही दफन कर दिया जाता। लेकिन युद्ध के बाद तीन कब्रिस्तान बनाए गए ताकि उन्हें सम्मानजनक तरीके से दफन किया जा सके। सबसे बड़ा कब्रिस्तान कंचनबूरी में है, जहां 6892 सैनिक दफन हैं। इनकी कब्रों पर जो पत्थर हैं, उन पर दिल छूने वाले संदेश लिखे हैं। कब्रिस्तान में गंभीर खामोशी छाई रहती है। कब्रों को देश के हिसाब से विभिन्न श्रेणियों में बनाया गया है। इन कब्रों के पास से गुजरते हुए मालूम होता है कि कुछ मृतक तो किशोरावस्था में ही थे और शायद पहली बार अपने घर से दूर निकले हों। कब्रिस्तान में एक रजिस्टर भी है जिससे पर्यटक अपने प्रियजनों की कब्र को तलाश सकते हैं।
इन दर्द भरी साइट के आसपास अब होटल, रिसॉर्ट, कैफे, रेस्त्रां और दुकानें खुल गई हैं। साथ ही पास में नेशनल पार्क, वर्जिन फॉरेस्ट, शांत नदियां और आकर्षक झरने भी हैं जो आपको मछली पकड़ने, राफ्ंिटग करने, बाइकिंग, गोल्फ   खेलने, ट्रैकिंग आदि का अवसर भी प्रदान करते हैं। सप्तांहत पर बैंकाक के स्थानीय लोग भी यहां ताजी हवा में तरोताजा होने के लिए आते हैं।
कंचनबूरी में एक प्राकृतिक आकर्षण तीन पगोडा पास है, जो कि थेनोन थोंकचाई पर्वत शृंखला में से एक ब्रेक है जो थाईलैंड व म्यांमार को बांटता है। कहा जाता है कि इसी के जरिए भारत से बौद्ध धर्म ईसा से तीन शताब्दी पूर्व थाईलैंड में पहुंचा था।
कैसे पहुंचें
* थाई एयरवेज से आप बैंकाक जाएं, जहां से सड़क से कंचनबूरी दो घंटे के फासले पर है।
* एपस्लयूटली फंटास्टिक हॉलीडेज कंचनबूरी के लिए पैकेज टूअर ऑफर करता है।
* बैंकाक में सियाम सिटी होटल में ठहरें और कंचनबूरी में रिवर कवाई रीसोटेल में रूक सकते हैं।
* रास्ते में रूक सकते हैं नखोन पखोन चेदी देखें। यह विश्व का सबसे ऊंचा बौद्ध स्मारक है। साथ ही शॉपिंग के विशिष्ट आनंद के लिए डेमनियोन सदूक फ्लोटिंग मार्केट जाएं।