श्रम करने में कोई शर्म नहीं


अमन को वह लड़का पसंद नहीं था, जो उसके पिता के साथ खड़ा था। उसने मैले से कपड़े पहन रखे थे। उसके पिता ने कहा, ‘यह विक्रम है। इसका तुम्हारी ही कक्षा में एडमिशन हुआ है। इससे अच्छा व्यवहार करना।’ उसकी मां ने कहा, ’मैं अमन के कुछ यूनिफार्म इसको दे दूंगी।’ जब विक्रम वहां से चला गया तो अमन के पिता बोले, ’बेचारा गरीब लड़का है। इसकी मां मेरे दफ्तर में सफाईकर्मी है। वह अपने बेटे के लिए बड़े सपने देखती है।’अगले दिन विक्रम अमन की यूनिफार्म पहनकर क्लास में आया। अमन को उसपर गुस्सा आया। अमन को पहचानते हुए विक्रम उसकी तरफ  मुस्कुराते हुए बढ़ा, लेकिन अमन ने उसे नजरंदाज कर दिया। विक्रम शर्मिंदा हुआ और वहां से चला गया। विक्रम अच्छा छात्र था, खूब ध्यान लगाकर पढ़ता था और टीचर द्वारा पूछे गये सभी प्रश्नों का उत्तर देता था। वह गणित में भी तेज था, सब सवाल हल कर लेता था। ब्रेक में जब विक्रम ने अपना लंच बाक्स खोला तो खट्टी दही की गंध पूरे क्लासरूम में फैल गई। अमन व उसके दोस्तों ने अपनी नाकों पर रुमाल रख लिए और विक्रम पर भद्दे कमेंट पास करने लगे...स्कूल के बाद अमन ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर विक्रम का रास्ता रोका और उसे धमकाने लगे, ’हमें अपनी क्लास में गंदा लड़का नहीं चाहिए। यहां से चले जाओ, नहीं तो हम तुम्हें मारेंगे।’ विक्रम ने जवाब दिया, ‘मैं स्कूल में पढ़ने के लिए आता हूं। मुझे अकेला छोड़ दो।’ लेकिन अमन व उसके साथी कुछ सुनने के लिए तैयार न थे, वह उसे पीटने के लिए आगे बढ़े।  अचानक विक्रम ने कराटे की मुद्रा ली और अमन पर वार किया, जो एक ही झटके में नीचे गिर गया। उसके साथी भाग खड़े हुए। तभी विक्रम ने तालियों की आवाज सुनी। यह क्लास टीचर मीनाक्षी थीं, जो कह रही थीं, ’अच्छा किया! इनका यही इलाज है। तुम्हारा कराटे अच्छा है।’ विक्रम ने झिझकते हुए कहा, ’मैं कराटे में ब्लैक बेल्ट हूं। मेरी मां अमन के पिता के दफ्तर में सफाईकर्मी है। ’अब अमन का एक ही लक्ष्य था- वह विक्रम से बेहतर नंबर लाना चाहता था। अर्द्ध-वार्षिक परीक्षा शुरू हो गई थीं। अमन ने रातभर पढ़ाई की थी, जमकर भोजन भी किया था। प्रश्नपत्र बंट गये। लेकिन जागने व भारी फूड के कारण अमन की तबियत खराब हो गई, वह उल्टी करने लगा। बदबू के कारण उसके दोस्त अपनी-अपनी नाक भींचकर क्लास से बाहर चले गये। सफाई कर्मी किंडरगार्टन के छात्रों में व्यस्त था, उसे आने में देर थी। विक्रम अमन के पास गया और उसे वाशरूम ले गया। उसने अमन की शर्ट व बनियान भी धोए और उन्हें सूखने के लिए टांग दिए। वह क्लास में लौटा और उसने वहां की भी सफाई करनी शुरू कर दी। टीचर ने उसे रोकना चाहा, लेकिन वह बोला, ’मैम चिंता न करें मुझे तो अपनी मां की मदद करने की आदत है।’ बाद में वह अमन के सूखे हुए कपड़े भी उठाकर लाया और सबने परीक्षा पूरी की। उस शाम टीचर ने देखा कि अमन स्वच्छ भारत अभियान में हिस्सा ले रहा है, वह स्लम के निकट सड़क साफ  कर रहा है और विक्रम कूड़ा एकत्र करने के लिए डस्टबिन लिए हुए है। उसे मालूम हो चुका था कि किसी भी प्रकार के श्रम में कोई शर्म नहीं है और कोई अपने कार्य से अछूत नहीं हो जाता।