वरिष्ठ नेताओं को राहुल बनायेंगे अपने सलाहकार


राहुल गांधी की राजनीतिक सलाहकार कमेटी के लिए कुछ नामों पर चर्चा चल रही है, जोकि इसका हिस्सा होंगे। माना जाता है कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी के चुनाव के बाद कांग्रेस अध्यक्ष वरिष्ठ नेताओं को अपने सलाहकार के तौर पर नियुक्त करेंगे। सैम पित्रोदा, अहमद पटेल, के. राजू और शीला दीक्षित के नामों पर विचार हो रहा है। 
यह भी माना जाता है कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी तथा ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी का पुन: चुनाव होने तक कोई भी संस्थागत बदलाव नहीं किए जायेंगे। राहुल गांधी द्वारा अब तक सिर्फ दो महिला नेताओं के कामकाज़ को ही बदला गया है, जिसमें श्रमिष्ठा मुखर्जी को दिल्ली की महिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि ज़ैदामी त्रिपुरा को चुनावी राज्य त्रिपुरा के लिए नामज़द किया गया है। 
‘सहानुभूति’ के लिए रैलियों की योजना
लालू प्रसाद के पुत्र तेजस्वी यादव बिहार के सभी ज़िलों में रैलियां करने की योजना को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। इन रैलियों द्वारा तेजस्वी अपने पिता के विरुद्ध भाजपा तथा संघ की ओर से की गई सांठगांठ को सभी के सामने प्रकट करेंगे। इसका उद्देश्य लोगों में यह राय बनाना है कि लालू निर्दोष हैं और वह भाजपा की साज़िश का शिकार हुए हैं।
तेजस्वी को उम्मीद है कि इन रैलियों से आम लोगों खासतौर पर यादवों तथा मुसलमानों के बीच बिहार के शिरोमणि नेता के लिए सहानुभूति पैदा करने में सहायता मिलेगी। राष्ट्रीय जनता दल के इस कदम को कांग्रेस द्वारा सहयोग दिए जाने के बारे में भी दावा किया जा रहा है।
 विपक्ष द्वारा यह महसूस किया जा रहा है कि शीघ्र ही नितीश कुमार को केन्द्र में भेज दिया जायेगा और भाजपा बिहार की सरकार पर अपना पूरा नियंत्रण बना लेगी, ऐसा कर्नाटक विधानसभा के चुनावों से पहले हो सकता है। 
गुजरात में आन्तरिक लड़ाई जारी
उप-मुख्यमंत्री नितिन भाई पटेल द्वारा पद संभालने के बाद चाहे गुजरात भाजपा की आन्तरिक लड़ाई कुछ समय के लिए ठण्डी पड़ी प्रतीत होती है, परन्तु मुख्यमंत्री विजय रूपाणी तथा अमित शाह को सहयोग दे रहे बनिये एक तरफ और दूसरे तरफ आनंदीबेन पटेल जोकि उप-मुख्यमंत्री को समर्थन दे रही हैं सहित पटेलों के बीच लड़ाई खत्म नहीं हो रही। दोनों पक्ष एक-दूसरे को नीचा दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ रहे। शपथ ग्रहण समारोह के बाद पहली कान्फ्रैंस में नितिन पटेल की कुर्सी के मुख्यमंत्री की कुर्सी से छोटा होने के प्रतीकवाद को निरीक्षकों द्वारा नहीं छोड़ा जा सकता। 
विश्वास की योजना
यह डर बढ़ रहा है कि आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास भाजपा के हाथों में खेल रहे हैं, ताकि पार्टी को दो हिस्सों में बांटा जा सके। कहा जाता है कि कुमार द्वारा ‘आप’ के विधायकों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत की जा रही है। 
राजनीतिक गलियारों में यह आंकलन लगाये जा रहे हैं कि पहले यह अपनी पार्टी बनाने की कोशिश करेंगे, जो बाद में भाजपा में शामिल हो जायेगी। राजनीतिक क्षेत्र मान रहे हैं कि शीघ्र ही कुछ दल बदलियां सामने आयेंगी, परन्तु ‘आप’ सूत्रों द्वारा ऐसी सम्भावनाओं को खारिज़ किया जा रहा है।