किसानों को अब देना होगा ज़मीन का रिकार्ड व स्व-घोषणा-पत्र


चंडीगढ़, 15 जनवरी (वार्ता, अ.स.) : पंजाब में कज़र् माफी स्कीम का लाभ पाने के लिए अब किसानों को अपनी ज़मीन का रिकार्ड तथा स्व-घोषणापत्र देना ज़रूरी होगा। कज़र् माफी स्कीम में खामियां पाए जाने के बाद हुई किरकिरी के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने आज यहां उच्च स्तरीय बैठक में इसको लेकर मंथन किया ताकि इस स्कीम का लाभ सिर्फ असली हकदार और योग्य किसानों को देना सुनिश्चित बनाया जा सके। सरकारी कर्मचारियों और पैंशन भोगियों को स्कीम के दायरे से बाहर रखने का फैसला किया है, जिससे गरीब को ही लाभ मिल सके। इस बारे में अधिसूचना जल्द जारी कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि स्व घोषणापत्र में किसानों को पंजाब तथा दूसरे राज्यों में अपनी ज़मीन का ब्यौरा देना होगा। ब्यौरे में सिर्फ सहकारी समितियों के सचिवों द्वारा दिए विवरणों पर ही भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि इनकी नियुक्ति अकालियों के राज में हुई थी। फसली कज़र् माफी स्कीम में स्व घोषणापत्र का मकसद स्कीम में किसी भी तरह की कमी न रह जाने को यकीनी बनाना है।  उन्हाेंने कहा कि इससे अकालियों द्वारा कज़र् माफी स्कीम बारे दुष्प्रचार करने की, की जा रही तुच्छ हरकतों को भी नकेल पड़ेगी। कज़र् माफी स्कीम को अमल में लाने संबंधी चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा उठाए मसलों के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कदमों से विधायकों द्वारा ज़ाहिर की आशंकाओं का निपटान करने में भी मदद मिलेगी। कैप्टन सिंह के मुख्य प्रधान सचिव सुरेश कुमार ने विधायकों को इस स्कीम को क्रमवार अमल में लाने की समूची प्रक्रिया की विस्तार में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आत्महत्या कर चुके किसानों का कज़र् माफ करने का फैसला विधानसभा की ओर से इस बारे में गठित कमेटी की रिपोर्ट आने पर लागू किया जाएगा। बैठक में विधायकों ने बताया कि कुछ बड़े ज़िमींदारों की ज़मीनें राजस्थान में हैं परंतु बठिंडा में ज़मीन 2.5 एकड़ क्षेत्रफल से कम होने के कारण वह कज़र् माफी वाली सूची में शामिल हो गए थे, जोकि बाकी किसानों में रोष पैदा होने का कारण बना। उन्होंने सुझाव दिया कि लाभपात्रों की सूची को अंतिम रूप देने से पहले सरकार उनसे ज़मीन बारे हल्फिया बयान ले। उन्होंने कहा कि बल्कि कई प्रवासी भारतीयों ने भी कज़र् माफी स्कीम का लाभ उठाया लिया, जोकि योग्य छोटे व मध्यम किसानों तक ही सीमित रहना चाहिए था। बैठक दौरान यह भी सुझाव दिया गया कि कज़र् माफी के प्रमाण-पत्र राजस्व रिकार्ड की पूरी जांच करने के बाद ज़िला स्तर पर दिए जाएं ताकि इस माफी का लाभ सही लाभपात्रों तक पहुंचाना यकीनी बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने विधायकों को भरोसा दिया कि इस स्कीम का दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार हरसम्भव कदम उठाएगी। बैठक में ग्रामीण विकास पर पंचायत मंत्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़, पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन लाल सिंह सहित कई विधायक मौजूद थे।