हथियारों की खरीद के लिए 15935 करोड़ मंजूर




नई दिल्ली, 13 फरवरी (वार्ता) : सरकार ने तीनों सेनाओं को अत्याधुनिक हथियारों से लैस करने की मुहिम के तहत इनके लिए 12 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक की लागत से सात लाख 40 हज़ार असाल्ट रायफलें खरीदने को मंजूरी दी है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आज यहां हुई रक्षा खरीद परिषद् (डीएसी) की बैठक में लगभग 15 हज़ार 935 करोड़ रुपए के सौदों को मंजूरी दी गयी। इन सौदों में 12 हज़ार 280 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से तीनों सेनाओं के लिए सात लाख 40 हज़ार अत्याधुनिक असाल्ट रायफलें, सेना और वायु सेना के लिए 982 करोड़ रुपए की 5 हज़ार 719 स्नाइपर रायफलें, 1819 करोड़ रुपए से तीनों सेनाओं के लिए हल्की मशीन गन और 850 करोड़ रुपए की लागत से नौसेना के लिए अत्याधुनिक तारपीड़ो प्रणाली खरीदी जाएंगी। डीएसी ने पिछली बैठक में भी सेना के अग्रिम मोर्चे पर तैनात जवानों के लिए रायफलों, कारबाइन और हल्की मशीन गन की खरीद को मंजूरी दी थी।
रक्षा सूत्रों के अनुसार असाल्ट रायफलों से तीनों सेनाओं के जवानों को लैस किया जायेगा और ये रायफलें ‘बॉय एंड मेक इंडियन’ श्रेणी के तहत आयुद्ध फैक्ट्रियों तथा निजी क्षेत्र से खरीदी जायेंगी। सरकार के इस निर्णय को जहां सेनाओं को अत्याधुनिक हथियार थमाकर मजबूत बनाने की दिशा में बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है वहीं इससे सरकार की रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की योजना को भी बल मिलेगा। सरकार ने तीनों सेनाओं के लिए असाल्ट रायफलों के साथ-साथ फास्ट ट्रैक प्रक्रिया से ज़रूरत के अनुसार  अत्याधुनिक हल्की मशीन गन खरीदने की भी मंजूरी दी है। ये मशीन गन खास तौर पर सीमाओं पर तैनात सैनिकों को दी जाएंगी। इसे सेनाओं की तात्कालिक ज़रूरतें तो पूरी होंगी ही विभिन्न तरह के अभियान चलाने संबंधी उनकी ज़रूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। सरकार बाकी मशीन गन की खरीद ‘बॉय एंड मेक इंडियन’ श्रेणी के तहत खरीदे जाने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है। वायुसेना और सेना के जवानों को अचूक हथियार मुहैया कराने के  लिए 5 हज़ार 719 स्नाइपर रायफलें खरीदी जाएंगी। यह खरीद ‘बॉय ग्लोबल’ श्रेणी के तहत की जायेगी लेकिन इन हथियारों के लिए गोले शुरू में खरीदे जाएंगे तथा बाद में इन्हें देश में ही बनाया जाएगा। नौसेना के युद्धपोतों की पनडुब्बी रोधी क्षमता बढ़ाने के लिए एडवांस तॉरपीड़ो डिकॉय सिस्टम ‘मारीछ’ की खरीद को मंजूरी दी गई है। मारीछ प्रणाली रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने देश में ही विकसित की है। इस प्रणाली का गहन परीक्षण और जांच की गई है जो पूरी तरह सफल रही है। यह प्रणाली भारत इलैक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा बनाई जाएगी। आतंकवादियों द्वारा सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाये जाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सरकार के इस निर्णय को सैन्यकर्मियों को अत्याधुनिक हथियारों से लैस करने की दिशा में बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है जिससे कि सैन्यकर्मी इन हमलों को विफल कर सकें तथा इनका मुंहतोड़ जवाब दे सकें।