क्रिकेटरों की नर्सरी बनता भारत


अंडर-19 विश्व कप क्रिकेट में इस वर्ष हुए मैचों में लगातार अपराजय रहते हुए विश्व कप जीतकर कुल चार बार यह खिताब अपने नाम कर भारत के युवा क्रिकेट सितारों ने साबित कर दिखाया है कि उनका दूर-दूर तक कोई सानी नहीं है। भारत के लिए 3 फरवरी का वो लम्हा वाकई गौरवपूर्ण था, जब हमारी यह टीम फाइनल में आस्ट्रेलिया के खिलाफ  एकतरफा अंदाज में 8 विकेट से मैच जीतकर ‘आईसीसी अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप’ खिताब अपने नाम करते हुए विश्व में यह खिताब सर्वाधिक बार जीतने वाली पहली विश्व चैम्पियन टीम बन गई। भारतीय युवा टीम ने यह विश्व कप वर्ष 2000, 2008, 2012 तथा अब 2018 में कुल चार बार जीता है जबकि आस्ट्रेलिया 1998, 2002 तथा 2010 में कुल तीन बार, पाकिस्तान 2004 व 2006 में दो बार, इंग्लैंड 1998 में, दक्षिण अफ्रीका 2014 में तथा वेस्टइंडीज 2016 में एक-एक बार यह विश्व कप जीतने में सफल हुए हैं। 2016 में भारतीय युवा टीम उपविजेता रही थी। वर्ष 2000 में भारत ने मोहम्म्द कैफ की कप्तानी में, 2008 में विराट कोहली, 2012 में उन्मुक्त चंद और इस बार पृथ्वी शॉ की कप्तानी में विश्व कप जीतने का यह कारनामा कर दिखाया। भारत के लिए यह खुशी से झूमने का लम्हा इसलिए भी है कि इससे पहले भारत की सीनियर टीम कपिल देव और महेन्द्र सिंह धोनी की कप्तानी में अब तक कुल दो बार सीनियर विश्व कप जीतने में सफल हुई है, वहीं इनसे कई कदम आगे निकलते हुए हमारे इन छोटे उस्तादों ने चार बार विश्व कप जीतकर इतिहास रच डाला है। ‘भारतीय टीम की दीवार’ और ‘मिस्टर कूल’ नाम से विख्यात तकनीकी रूप से भारत के सबसे दक्ष क्रिकेटर माने जाने वाले राहुल द्रविड़ के मार्गदर्शन में तैयार हुई इस बार की टीम से इस करिश्मे की उम्मीद हालांकि पहले से ही की जा रही थी और संतोष की बात यह रही कि कोच राहुल द्रविड़ तथा कप्तान पृथ्वी शॉ की जोड़ी ने देशवासियों को निराश नहीं किया। निश्चित रूप से यह द्रविड़ के कोचिंग कैरियर की भी सबसे बड़ी उपलब्धि है और निकट भविष्य में उनके टीम इंडिया के कोच बनने की संभावनाओं से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। बताया जाता है कि बीसीसीआई की कमान जब अनुराग ठाकुर के हाथों में थी, तब द्रविड़ को टीम इंडिया का कोच बनने का निमंत्रण दिया भी गया था किन्तु उन्होंने यह ऑफर यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि उन्हें जूनियर टीम के साथ जुड़े हुए थोड़ा ही समय हुआ है और पहले वह इस जिम्मेदारी को पूरा करना चाहते हैं। उसके बाद 2016 के विश्व कप में द्रविड़ की ही कमान में जूनियर टीम फाइनल तक पहुंचने में सफल हुई थी और अब 2018 में विश्व कप पर कब्जा करने में।मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का कहना है कि विश्व चैम्पियन भारतीय अंडर-19 टीम विश्व कप में अन्य प्रतिद्वंद्वियों से अव्वल थी और जिस प्रकार से इस टीम ने शारीरिक व मानसिक रूप से खुद को तैयार किया, जिस तरह की उसकी रणनीति थी और जिस प्रकार से उन्होंने उस पर अमल किया, उसका कोई सानी नहीं था और यह सबूत है कि भारतीय टीम अन्य प्रतिभागियों से पूरी तरह हटकर थी। दरअसल पूरी प्रतियोगिता में भारतीय टीम अपराजय रही। विश्व कप में टीम की शुरूआत ही आस्ट्रेलिया को 100 रनों से हराने के साथ हुई थी, जिसके बाद सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 200 रनों के भारी अंतर से धूल चटाई और फाइनल में आस्ट्रेलिया को 8 विकेट से हराकर एकतरफा अंदाज में मुकाबला जीत विश्व कप अपने नाम कर इतिहास रच डाला। रफ्तार का जादू, स्पिन कला, दिलकश बल्लेबाजी और अपारम्परिक शॉट, पूरी श्रृंखला के दौरान सभी कुछ बेहतरीन था। निश्चित रूप से खुद को टीम के युवा खिलाड़ियों ने शारीरिक एवं मानिसक रूप से तैयार कर जिस प्रकार बल्लेबाजी, गेंदबाजी एवं क्षेत्ररक्षण इन तीनों ही क्षेत्रों में रणनीतिक महारत हासिल की, उसका इस विजय अभियान में बहुत बड़ा योगदान रहा।
यह जीत भारत में क्रिकेट के स्वर्णिम दौर की ओर इंगित करती है क्योंकि क्रिकेट के हर फॉर्मेट में अब भारत के पास विश्वस्तरीय बेहतरीन खिलाड़ी मौजूद हैं। कहना गलत न होगा कि भारत अब क्रिकेटरों की नर्सरी बनता जा रहा है। एक ओर जहां टीम इंडिया लगभग सभी मैचों में बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं, वहीं महिला क्रिकेट टीम भी अपने शानदार प्रदर्शन के जलवे दिखा चुकी है और अब छोटे उस्तादों के कारनामे भी क्रिकेट के सुनहरे भविष्य को लेकर उत्साहित करने के लिए पर्याप्त हैं, यह विश्वास जगाने के लिए भी कि देश में बेहतरीन क्रिकेटरों की कमी कभी नहीं होगी। हमें गर्व होना चाहिए कि आईसीसी की टॉप टेन रैंकिंग में जहां कुछ भारतीय क्रिकेटर भी शामिल हैं, वहीं गेंदबाजी और बल्लेबाजी के मामले में हमारी टीम दुनिया में पहले या दूसरे नंबर आती है । कपिल देव का मानना है कि क्रिकेट की जो नई पीढ़ी सामने आ रही है, कुछ समय बाद वही भारत की राष्ट्रीय टीम होगी। आईसीसी ने अंडर-19 टीम की जो घोषणा की है, उसमें प्लेइंग-11 में विश्व कप जीतने वाली टीम के 5 खिलाड़ियों पृथ्वी शॉ, मनजोत कालरा, शुभमन गिल, अनुकूल रॉय और कमलेश नागरकोटी को चुना है। शुभमन ने टूर्नामेंट में एक शतक व तीन अर्द्धशतक के साथ 372 रन बनाए थे जबकि फाइनल में नाबाद शतक ठोंकने वाले मनजोत ने 252 और कप्तान पृथ्वी शॉ ने 261 रन बनाए थे। इसी प्रकार अनुकूल ने पूरे टूर्नामेंट में कुल 14 विकेट चटकाए जबकि तेज गेंदबाज नागरकोटी ने 9 विकेट हासिल किए थे। अगर ये खिलाड़ी भविष्य में विराट कोहली और मोहम्मद कैफ  की ही भांति टीम इंडिया का हिस्सा बनकर ऐसे ही देश का नाम रोशन करें तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। फिलहाल टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली का कहना बिल्कुल सही है कि इस जीत को शुरूआत के रूप में लेना चाहिए क्योंकि अभी तो लंबा रास्ता तय करना है। टीम के कोच द्रविड़ का भी यही मानना है कि इस महाविजय की याद ही इन खिलाड़ियों के करियर को परिभाषित नहीं करेगी बल्कि इन्हें अब आगे अधिक बड़ी और बेहतर चुनौतियों का सामना करना है।