राष्ट्र-मंडल कुश्ती चैम्पियन हरप्रीत सिंह संधू


पहलवानी में भारतीय पहलवानों के ज़ोर का लोहा पूरी दुनिया मानती है और भारतीय पहलवानों की इस कड़ी में नया नाम जुड़ता है पहलवान हरप्रीत सिंह संधू का। ज़िला संगरूर के गांव कड़ैल (मूनक) में 7 फरवरी, 1993 को पिता स. लक्षमण सिंह संधू और माता बलवीर कौर की गोद का शृंगार बने हरप्रीत सिंह संधू को पहलवानी अपने बुजुर्गों से विरासत में मिली, क्योंकि इनके दादा जी भी पहले पहलवानी करते रहे और पिता जी भी कबड्डी के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। घोड़ियां रखने के खानदानी शौकीन हरप्रीत सिंह संधू के परिवार को क्षेत्र में पहलवानों के परिवार के नाम से जाना जाता है।हरप्रीत सिंह संधू ने 2015 में खेल कोटे में भारतीय रेलवे  ज्वाइन की और 2017 में रेलवे की नौकरी छोड़ते हुए पंजाब पुलिस के खेल कोटे में बतौर सब-इंस्पैक्टर ज्वाइन किया।हरप्रीत सिंह संधू 2008 से 2017 तक कुश्ती के राष्ट्रीय मुकाबलों में भिन्न-भिन्न वजनों में खेलते हुए स्वर्ण पदक जीते आ रहे हैं। 2014 में साऊथ कोरिया में हुई एशियन खेलों में भाग लिया। 2016 में सीनियर एशियन कुश्ती चैम्पियनशिप (थाईलैंड) और कामनवैल्थ चैम्पियनशिप (सिंगापुर) में क्रमवार कांस्य और स्वर्ण पदक जीता। 2017 में फिर सीनियर एशियन कुश्ती चैम्पियनशिप (दिल्ली) और कामनवैल्थ कुश्ती चैम्पियनशिप (दक्षिण अफ्रीका) में क्रमवार कांस्य और स्वर्ण पदक जीता।
ओलम्पिक खेलों में भारतीय तिरंगे के लिए पदक जीतने का स्वप्न संजोए हरप्रीत सिंह संधू इसी माह 2018 में किर्गिस्तान में होने वाली सीनियर एशियन कुश्ती चैम्पियनशिप के लिए दंगल में पसीना बहा रहे हैं।