कर्ज़माफी स्थायी समाधान नहीं : चंदूमाजरा


संगरूर, 18 फरवरी (सत्यम्/अलका बांसल) : राज्य में किसानों तथा मजदूरों द्वारा की आत्महत्याओं संबंधी विभिन्न राजनीतिक दलों के चुने नेताओं की हुई खुली गोष्टी को संबोधित करते शिरोमणि अकाली दल के महासचिव तथा सदस्य पार्लियामैंट आनंदपुर साहिब प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि कर्ज माफी केवल एक सहारा है, यह कोई स्थाई समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर सभी राजनीतिक पार्टियों के एकत्रित होने की ताकि किसानों की की जा रही आत्महत्याओं का कोई उचित समाधान निकाला जा सके। प्रो. चंदूमाजरा ने कहा कि 19 तथा 20 फरवरी को दिल्ली में कृषि माहिरों की खुली बहस किसान मामलों को लेकर हो रही है और विचार सुझावों पर पार्लियामैंट में भी चर्चा की जाएगी। किसानों को अतिरिक्त खर्च, दिखावा न करने की अपील करते चंदूमाजरा ने कहा कि एक यह भी असूल बना लें कि किसान भाई अपने बच्चों की शादियों पर नेताओं को बुलाने से भी गुरेज करें क्योंकि एक नेता के साथ 40-40 व्यक्ति पहुंचकर शादी के बजट को और बढ़ा देते हैं। कांग्रेस द्वारा अध्यक्षता कर रहे हलका धूरी के विधायक दलवीर सिंह गोल्डी ने बड़ी ही भावुक दलील देते कहा कि जब एक किसान आत्महत्या करता है तो उससे उसका पूरा परिवार भी आत्महत्या कर लेता है। उन्होंने कहा कि पहले ही गुरबत से जूझ रहे उस बदनसीब परिवार को अपने बच्चों का पालन पोषण करना भी मुश्किल हो जाता है। दृड़ अंदाज में गोल्डी ने कहा कि वह ऐसे परिवारों के बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा अपने सिर लेते हैं तथा इस संबंधी आवाज़ विधानसभा में भी उठाएंगे। 
सदस्य पार्लियामैंट संगरूर भगवंत मान ने राजनीतिक दलों द्वारा जारी चुनाव मैनीफैस्टो को रजिस्टर्ड डाकूमैंट करार देने पर जोर देते कहा कि ऐसा होने से राजनीतिक पार्टियां जनता से चुनावों दौरान झूठे वादों से गुरेज करेंगी। उन्होंने कहा कि अगर किसान की फसल नष्ट होने पर उसको मुआवजा मिलता है तो उससे खेत मजदूरों को भी मुआवजा मिले। सदस्य पार्लियामैंट पटियाला डा. धर्मवीर गांधी ने कहा कि जब तक खेती लाभदायक धंधा नहीं बनती तब तक इस मामले का समाधान नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश में अब तक 1993 से लेकर 3.50 लाख किसान आत्महत्याएं कर चुके हैं जिनमें पंजाब के किसान भी शामिल हैं। गांधी ने देश में खेती संबंधी ठोस नीति बनाने पर जोर दिया। इस मौके पर पूर्व विधायक बाबू प्रकाश चंद गर्ग, प्रबंधकों में सर्बजीत सिंह धालीवाल, करनैल सिंह जखेपल, डा. ए.एस. मान, सुर्जन सिंह, निर्मल सिंह समाना, त्रिलोचन सिंह, फलजीत सिंह के अलावा जिला परिषद् के चेयरमैन सतगुरू सिंह नमौल, चंद सिंह चट्ठा, रणधीर सिंह काका सारों, हरविन्द्र सिंह काकड़ा आदि भी उपस्थित थे।