निशानेबाज़ी में भारत का मान  पंजाबण  हिना सिद्धू


शाही शहर पटियाला में पैदा हुई हिना सिद्धू ने निशानेबाज़ी में जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वह किसी और भारतीय महिला निशानेबाज़ के हिस्से नहीं आई हैं। स. राजबीर सिंह ई.टी.ओ. और श्रीमती रामिंदर कौर की सुपुत्री हिना सिद्धू ने हाल ही में गोल्ड कोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण और रजत का 1-1 पदक जीतकर एक बार फिर देश का नाम रौशन किया। मुम्बई वासी अर्जुन अवार्ड प्राप्त निशानेबाज़ अशोक पंडित के सुपुत्र रौणक पंडित से हिना का विवाह 2013 में हुआ। रौणक भी अंतर्राष्ट्रीय खेल उत्सवों में देश के लिए पदक जीत चुके हैं और आजकल हिना के कोच की ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं। जर्मनी में विश्व कप खेले जाने से पहले हिना सिद्धू से फोन पर हुई बाचतीत ‘अजीत समाचार’ के पाठकों के समक्ष है :-
हाल ही में राष्ट्रमंडल खेलों में जीते दो पदकों के बाद अगला लक्ष्य क्या है?
-राष्ट्रमंडल खेलों में जीते पदकों से मेरा उत्साह बहुत बढ़ा है। लक्ष्य तो मैं पहले भी कई बार बता चुकी हूं। सिर्फ ओलम्पिक खेलों में ही देश के लिए पदक जीतना है, जिसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं।
आप अपने प्रदर्शन से किस हद तक संतुष्ट हैं?
-मैं अपने प्रदर्शन में स्थिरता लाने के लिए यत्नशील हूं। मेरे साथ कई बार हो चुका है कि एक-दो टूर्नामैंटों में मेरी कारगुज़ारी अच्छी रहती है और अगले टूर्नामैंट में मैं अपने स्कोरज़ का स्तर कायम नहीं रख पाती। इस कमी को दूर करके मैं अपने अच्छे प्रदर्शन में निरंतरता लाना चाहती हूं।
इस तरह प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव आ जाएं तो आप क्या कारण मानती हैं?
-मैंने अपने करियर की शुरुआत 10 मीटर एयर पिस्टल इवैंट से की थी। फिर 2017 में मैं 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल मुकाबले में भी हिस्सा लेने लगी। इस तरह जहां पहले मैं 10 मीटर एयर पिस्टल व्यक्तिगत और टीम मुकाबले में हिस्सा लेती थी। किसी भी अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामैंटों में इन दोनों इवेंटों में दो-तीन दिन आराम के लिए मिल जाते थे। लेकिन अब मुझे 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल मुकाबले में हिस्सा लेने के कारण पूरे टूर्नामैंट के दौरान 7-8 दिन लगातार मुकाबलेबाज़ी में हिस्सा लेना पड़ा है, जिस कारण थकावट भी मेरे प्रदर्शन में कहीं न कहीं गिरावट लाने के लिए ज़िम्मेवार बनते हैं।
आजकल किस टूर्नामैंट की ओर ध्यान केन्द्रित है?
-जर्मनी के शहर म्यूनिख में 22 से 29 मई तक होने वाले विश्व कप में तैयारी के लिए मैं जर्मनी के शहर फोर्जीयम में कर रही हूं और विश्व कप से पहले अभ्यास मैच भी खेल चुकी हूं। आशा है कि विश्व कप में मैं अपना स्तर कायम रखूंगी और एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराऊंगी।
पंजाब में निशानेबाज़ी को प्रफुल्लित करने के लिए क्या सुझाव देंगी?
-पंजाब के बहुत सारे नए निशानेबाज़ आगे आ रहे हैं। इनको सम्भालने के लिए स्तरीय कोचिंग और सुविधाएं देने की ज़रूरत  है। अंतर्राष्ट्रीय खेल मंच पर पिछले कुछ वर्षों के दौरान निशानेबाज़ों ने ही अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पंजाबियों द्वारा सबसे अधिक पदक जीते हैं। इसके साथ ही हरियाणा की तरह विजेता खिलाड़ियों को समय पर नकद पुरस्कार दिए जाएं और यह हरियाणा की तर्ज पर दिए जाएं। वैसे ज़रूरत है देश के सभी राज्यों में नकद पुरस्कारों में समानता लाई जाए, जिससे खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ेगा।