पंजाब व हरियाणा के 100 गांवों में पेयजल का गंभीर संकट


मानसा, 16 मई : भाखड़ा नहर में लम्बे समय से पानी न छोड़ने के कारण पंजाब व हरियाणा के 100 से अधिक गांवों के लोग जहां पानी पाने वाले शुद्ध पानी को तरस रहे हैं वहां नरमे की बिजाई भी पिछड़ गई है। विभाग द्वारा अप्रैल माह में मुरम्मत के कारण लगभग 1 माह से पानी बंद कर दिया था, जिसका असर मानसा ज़िले के सरदूलगढ़ व झुनीर क्षेत्र के 80 के लगभग गांवों के अलावा हरियाणा के फतेहाबाद ज़िले के क्षेत्र रतिया व सिरसा ज़िले के कालांवाली, रोड़ी व सिरसा क्षेत्र में पड़ा था। पिछले दिनों पानी छोड़ने के साथ लोगों ने सुख की सांस ली थी, परन्तु सप्ताह के बाद फिर पानी न छोड़ने के कारण लोगों के श्वास ही सूख गए हैं।नरमे की बिजाई पिछड़ी : कृषि विभाग द्वारा किसानों को 15 अप्रैल से 15 मई तक नरमे की बिजाई करने की सलाह दी जाती है परन्तु भाखड़ा नहर में पानी न छोड़ने के कारण सरदूलगढ़, झुनीर व हरियाणा के कुछ गांवों में नरमे की बिजाई पिछड़ गई है। एक सप्ताह भाखड़ा में पानी चलने के कारण व ट्यूबवैलों द्वारा चाहे किसानों ने 50 फीसदी नरमे की बिजाई कर ली है, परन्तु आधे खेत अभी भी खाली पड़े हैं। किसान बलजीत सिंह झंडा ने बताया कि इन खेतों का धरती निचला पानी न सिंचाई के योग्य है व न ही पीने के, जिस कारण लोग सरकारों के मुंह की ओर झांक रहे हैं।  सिंचाई विभाग की लापरवाही की शिकार है न्यू ढुडाल नहर : भाखड़ा मुख्य नहर के फतेहपुर हैडवर्क्स से निकलने वाली न्यू ढुडाल नहर पंजाब सरकार के सिंचाई विभाग द्वारा पिछले काफी समय से लापरवाही का शिकार है। इस नहर फत्ता मालोका के कुछ भागों को पानी देने के अलावा सरदूलगढ़ सब-डिवीज़न के घग्गर के पार लगभग 18 गांवों को सिंचाई व पीने वाला पानी सप्लाई करती है। इस नहर की  व इस क्षेत्र की पहली बदकिस्मती तो यह है कि इस नहर की वार्डबंदी पर हरियाणा का कंट्रोल है। दूसरा इस नहर की बनावट में खराबियां हैं, जिस कारण यह नहर पूरी समर्था के अनुसार पानी नहीं ले जा सकती। तीसरा इस नहर की सफाई बहुत लम्बा समय न होने के कारण भी टेलां पर खेतों को पानी नहीं मिलता। घग्गर से अगले गांवों के लिए तो यह नहर जीवन रेखा है, क्योंकि इस क्षेत्र में धरती निचला पानी खारा है व पीने के लिए या सिंचाई के लिए नहीं प्रयोग किया जाता। ज्यादा मार टेलां वाले गांवों जहां झंडा कलां, मानखेड़ा, संघा, राजराणा, करंडी, नाहरां व एक हरियाणे के गांव बरूवाला को पड़ती है।  क्षेत्र के लोगों की मांग है कि इस नहर में लगातार पानी छोड़ा जाए व और छिमाही इसकी सफाई करवाई जाए।लोग पीने वाले पानी को तरसे : जिन गांवों के लोग नहरी वाटर वर्क्सों पर निर्भर हैं वहां पीने वाले पानी का बुरा हाल है। लोग धरती निचला खारा व कौड़ा पानी पीने के लिए मजबूर हैं। जिन गांवों में न आर.ओ. है व न ही जल घर हैं वहां दूर-दूदराज जगहों से नलकों या ट्यूबवैलों से पानी भर रहे हैं। सरदूलगढ़ क्षेत्र के कई गांव तो पुराने पंजाब का दृश्य पेश करते हैं। जल घरों के तलाबों में पानी समाप्त हो जाने के कारण मजबूरीवश कई गांवों के लोगों ने ट्यूबवैल लगवा लिए हैं, जिनमें गांव मीरपुर, झंडा कलां आदि शामिल हैं। इसके अलावा लोगों को पशुओं के लिए भी पानी ट्यूबवैल चला कर घरों में ढोना पड़ रहा है।20 मई को छोड़ा जाएगा पानी : जब इस संबंध में विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों के साथ बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि अप्रैल माह भाखड़ा की मुरम्मत के कारण बंद हो गई थी। अब पानी छोड़ दिया गया है, परन्तु इसको 3 ग्रुपों में छोड़ना शुरू कर दिया है, टोहाणा ग्रुप, रतिया, रतनगढ़ व फतेहपुर ग्रुप। एक ग्रुप में सप्ताह पानी चलता है व 2 सप्ताह बंदी रहती है। फतेहपुर ग्रुप में 20 मई को पानी छोड़ा जाएगा, जो 27 मई तक चालू रहेगा। क्षेत्र के लोगों की मांग है कि हाड़ी-साऊनी के सीज़न दौरान पानी लगातार छोड़ा जाए व आम दिनों में भी 2 सप्ताह लगातार पानी दिया जाए ताकि लोगों को पीने व सिंचाई के लिए पानी की मुश्किल न आए।