तापमान 44 डिग्री, जलने लगी नरमे की फ सल


बठिंडा,  27 मई (कंवलजीत सिंह सिद्धू): बठिंडा में तापमान के 44 डिग्री सैल्सियस पर पहुंचने पर पड़ रही कहर की गर्मी कारण लोग त्राहि-त्राहि करने लगे हैं। इस के कारण न केवल कारोबार प्रभावित हुए हैं बल्कि खेती सैक्टर पर भी कहर की गर्मी ने बहुत प्रभाव डाला है। 
उत्तरी भारत की कपास पट्टी जो पहले नहरी पानी की लम्बे सूखा के कारण पहले ही नरमे कपास की बुआई प्रभावित कर रही थी, अब पड़ रही कहर की गर्मी और फि र नहरों के सूखने कारण नई उगे और उग रही नरमे के पौधे गर्मी कारण जलने लगे हैं। जिसके कारण किसानों की मुश्किलें और भी अधिक बढ़ गई हैं। पंजाब के टीलों पर पड़ते क्षेत्रों और पड़ोसी राज्य हरियाणा के डबवाली, सिरसा, कालियांवाली की नरमा पट्टी में स्थिति  और भी बुरी हो गई है, जहां पर हर खतरे में पड़ा किसान बड़े प्रयासों से बीजी नरमे की फ सल को बाल्टियों से पानी डाल कर बचाने का यत्न कर रहे हैं। परन्तु तापमान 44 डिग्री सैल्सियस के पार जाने के कारण किसानों के लिए यह यत्न कठिनाइयों से भरा है। इस बार नहरी पानी की बंदी के कारण जहां गत वर्षों के मुकाबले नरमे की काश्त के आधीन क्षेत्रफ ल में काफी कटौती होने की संभावना जताई जा रही है, वहां अब तक एक दो इंच तक बामुश्किल पहुंचे नरमे के पौधों पर रोम ने मार करनी शुरू कर दी है। खेती विशेषज्ञों ने चिंता ज़ाहिर करते कहा कि अगर आगामी एक दो दिनों में तापमान में कमी और वर्षा न हुई तो नरमा पट्टी में गर्मी कारण बड़े स्तर पर फ सल के तबाह होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। जो कि किसानों के लिए आर्थिक समस्याएं और बढाएगी।  इस सम्बन्धित उद्यम सिंह का कहना था कि लेबर की कमी और बिजली की कमी, डीज़ल की बढ़िया कीमतों ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। उन्होंने कहा कि जैसे-तैसे पहले नरमे की बिजाई की है और अब गर्मी के कारण उत्पन्न फ सल भी जलने लगी है। जिस के लिए पानी का प्रबंध करना अत्यंत ही अनिवार्य है। नरमा पट्टी के किसानों का कहना है कि पानी की किल्लत और तापमान में वृद्धि कारण धरती खुष्क हो गई है। रेतीले वाहनों में तस्वीर और भी बदतर स्थिति पेश कर रही है। जहां गर्मी के कारण फ सल जलने लगी है। अगर हालात इस तरह ही तापमान के वृद्धि वाले बने रहे और आते दिनों में बारिश न पड़ा और हालात इसी प्रकार के बने रहे तो नरमे /कपास की नई उग रही और उगी फ़सल के जलने कारण किसानों को बड़ी आथिज़्क मार की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। कुल मिला कर नरमा पट्टी के किसानों की सहायता अब इंद्र देवता की मेहर पर आ टिकी है। जो अब वही किसानों को कुदरती तौर पर राहत प्रदान कर सकता है।