रस भरे शहतूत



शहतूत फलों में से एक है। यह गर्मी के मौसम की देन है। शहतूत के पेड़ बाग-बगीचों में लगभग सभी जगह देखे जा सकते हैं। इसके पत्तों पर रेशम के कीड़े पाले जाते हैं। शहतूत की दो किस्में होती हैं, काली और सफेद। दोनों ही तरह के शहतूत लम्बे, मीठे, रसीले और स्वाद भरे होते हैं। स्वाद के साथ यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होते हैं।
शहतूत को मीठा, बल, वर्ण और अग्नि को बढ़ाने वाला बताया है। यह ठंडी तासीर वाला तथा पित्त और वायु विकारों का शमन वाला बताया गया है। शहतूत को रक्तशोधक और कृमिनाशक माना गया है। यह मस्तिष्क, हृदय और तिल्ली के लिए फायदेमंद है। विश्लेषकों के अनुसार शहतूत में विटामिन बी, सी, मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन आदि तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं।
शहतूत के 
औषधीय गुण
* शहतूत जुकाम और गले के रोगों में हितकर है।
* पित्त और रक्तविकार दूर करने के लिए गर्मी के मौसम में दोपहर के समय शहतूत खाने चाहिएं।
* छाले और गलग्रन्थि शोध में शहतूत के शरबत का एक चम्मच एक कप पानी में मिलाकर गरारे करने से लाभ होता है।
* शहतूत का शरबत प्यास दूर करता है। कफ कानाश करता है तथा बुखार में लाभ पहुंचाता है।
* गला बैठने या आवाज़ भारी हो जाने पर शहतूत के पत्तों का क्वाथ बना कर दिन में तीन-चार बार गरारे करने पर लाभ होता है।
* पैरों में बिवाई फटने पर शहतूत के बीजों को पीसकर लेप लगायें। (स्वास्थ्य दर्पण)
—परशुराम संबल