पानी की निकासी के घटिया प्रबन्धों से राज्य की सड़कों की हो रही बर्बादी



गढ़शंकर, 12 जून (धालीवाल) : राज्य के मुख्य मार्गों के अतिरिक्त गांवों से शहरों को जाने वाले लिंक सड़कों को पानी की निकासी के घटिया प्रबन्धों के कारण लगातार चूना लग रहा है। मुख्य मार्गों के अतिरिक्त गांवों व शहरों में सड़कों का बहुत जगह पर पानी की निकासी के उचित प्रबन्ध न होने के कारण बर्बादी लगातार जारी है। समय-समय की सरकारों द्वारा सड़कों के सुधार के नाम पर विकास के लिए खर्चे जा रहे करोड़ों रुपए को दीमक लगा देखने को मिलता है, जिसकी किसी को चिंता नहीं। घर से गंदे पानी सहित वर्षा के पानी से सड़कों पर छप्पड़ का रूप धारण कर चुके दृश्य आम देखने को मिलते हैं जो कई बार हादसों का भी कारण बन चुके हैं। गंदे पानी की निकासी के घटिया प्रबन्धों से जुड़े दृश्य लिंक सड़कों के अतिरिक्त राष्ट्रीय मार्गों पर भी आम देखने को मिल जाते हैं। चाहे विकास की दृष्टि से सरकारें चलाने वाले राजनीतिज्ञ बड़े-बड़े दावे करते हैं परन्तु यदि पूरे राज्य के पानी की निकासी के प्रबन्धों की ओर देखा जाए तो शेष राज्यों की अपेक्षा पंजाब की तस्वीर अभी भी पिछड़ी हुई दिखाई देगी। योजनाबद्ध ढंग े सड़कों के सुधार के साथ-साथ वर्षा और घरों के गंदे पानी के निकास के लिए किए जाते दावे खोखले ही साबित नहीं होते बल्कि दयनीय हालात पैदा करने वाले हैं।
 पानी की निकासी को नज़रअंदाज़ किए जाने का परिणाम : मुख्य तौर पर निर्माण करने वाले राज्य के लोक निर्माण विभाग व अन्य विभागों द्वारा मुख्य मार्गों के अतिरिक्त गांवों व शहरों से जुड़ी लिंक सड़कों का निर्माण करते समय पानी की निकासी की ओर विशेष ध्यान न देने के कारण सड़कों की हालत खराब होती जा रही है। विभागों द्वारा सड़कों के निर्माण से पहले गांवों, मोहल्लों के पानी के निकास का खास प्रबन्ध करवाए बिना ही सड़कों का निर्माण करवा कर अपना कार्य समाप्त कर लिया जाता है। पानी के निकास को अनदेखा किए जाने के उद्देश्य से बहुत से स्थानों पर हालात ऐसे देखने को मिलते हैं कि सड़कों के निर्माण के बाद ही लाखों रुपए खर्च करके बनी सड़कें गंदे पानी की चपेट में आने से टूटी शुरु हो जाती हैं।
सरकारी सम्पत्ति का नहीं कोई रखवाला : सरकार द्वारा सड़कों के सुधार सहित विकास कार्यों पर लगाए गए करोड़ों रुपए की सम्पत्ति को सम्भालने के लिए कोई भी व्यक्ति दिखाई देता है। जहां तक सड़कों की संभाल की बात है, गांवों की पंचायत के पदाधिकारी, शहरों के कौंसलर गंदे पानी की निकासी के लिए ग्रांट की मांग के तौर पर प्रयास अवश्य करते होंगे, परन्तु गंदे पानी से खराब हो रही सड़क के मामले में सभी चुप हैं।
पानी का दुरुपयोग भी बन रहा है नुकसान का बड़ा कारण : पहले समय से अब प्रत्येक घर में पानी का उपयोग बहुत बढ़ गया है, जिसको यदि दुरुपयोग भी कह दिया जाए तो कुछ हद तक ठीक होगा। सरकारी टूटियों, नलकों के स्थान पर प्रत्येक घर में सबमर्सीबल पम्पों ने ले ली है। जहां लोगों द्वारा सबमर्सीबल पम्पों से भूमिगत जल निकाला जा रहा है। कच्चे घरों से पक्के बने घरों की पानी से लिफ्टिंग, वाहनों को धोने के साथ कई अन्य कार्यों के लिए प्रयोग किए जाते पानी के कारण नालियां/नाले पानी से आम भरे हुए देखने को मिलते हैं, जो प्रत्यक्ष तौर पर सड़कों की बर्बादी का कारण बनते हैं।
सरकार व प्रशासन की सुस्ती भी परिस्थितियों के लिए ज़िम्मेवार : वर्षा और घरों के गंदे पानी की निकासी की समस्या के कारण सड़क की बिगड़ रही परिस्थितियों के लिए जिम्मेवार लोगों के खिलाफ कार्रवाई तो दूर की बात, बल्कि सरकार व प्रशासन द्वारा ऐसी समस्याओं से निजात दिलाने के लिए कभी गम्भीर प्रयास नहीं किए गए। लोगों के चुने हुए प्रतिनिधि व अधिकारियों की गाड़ियां सड़कों पर जमा हुए छप्पड़ों से गुजरती अवश्य हैं परन्तु कभी किसी प्रतिनिधि या अधिकारी ने सुधार के लिए इस मामले को उच्च स्तर पर उठाने की ज़रूरत नहीं समझी।
सड़कों व घरों को ऊंचा उठाने का नाटक : विभाग पानी के प्रभाव से सड़कों को बचाने के लिए सड़क ऊंची करने को प्राथमिकता देता है, पानी की निकासी को लेकर लोगों द्वारा घर कई-कई फुट ऊंचे बनाने का रुझान बढ़ गया है। यह नाटकीय ढंग नई बनने वाली सड़कों के इर्द-गिर्द देखने को मिलता है। गांवों से गुज़रने वाली सड़कों व घरों का पानी अक्सर सड़क को नुकसान पहुंचाता है, परन्तु ग्रामीण विकास व पंचायत विभाग से गंदे पानी की निकासी के लिए सम्पर्क बनाए बिना ही सड़क को ऊंचा उठाने में ही भलाई समझते हैं। इन परिस्थितियों में अनेक घर सड़क ऊंची होने के कारण पानी की समस्या से जूझने लगते हैं।