साफ-स्वच्छ, अनुशासनबद्ध हॉकी खेलने की ज़रूरत


आदमी की बुद्धि और विवेक को सलाम। हॉकी खेल के पक्ष  से भी प्रशंसा की हकदार है, जिसने हॉकी  जैसी तेज, जोशीली, सनसनीखेज खेल अस्तित्व में लाई, जिसमें हथियारनुमा हॉकियों का इस तरह प्रतिभावान ढंग से इस्तेमाल करना है कि किसी को चोट न लगे। इसलिए इस खेल को अपनाने वाले सभी हॉकी  खिलाड़ी इस पक्ष से सुचेत रहें। उनका इस खेल के प्रति यह फज़र् बनता है कि वह साफ-स्वच्छ, अनुशासनबद्ध खेल का प्रदर्शन करते स्पोर्ट्समैनशिप का खूबसूरत नमूना पेश करें। खिताब जीत की दौड़ में खेल के नियमों, खेल की मर्यादा को अनदेखा करना कभी भी किसी खेल मैदान में प्रशंसा का सबब नहीं बनता। पिछले कुछ समय से हमने देखा कि हमारे खिलाड़ियों ने एक सभ्याचारक खेल रहने नहीं दिया है। विशेष तौर पर स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी स्तरीय लोकप्रिय टूर्नामैंट में भी उनके लचर प्रदर्शन ने अपनी सभी हदें- बांधी और तोड़ी हैं। उन्होंने चाहे इसमें कोई शर्म महसूस की या नहीं परन्तु हॉकी  ज़रूर शर्मसार और बदनाम हुई है। अम्पायरों द्वारा हरे, पीले और लाल कार्डों का दिखावा बढ़ा, जो हॉकी के लिए शुभ संकेत नहीं। हम जिस दौर में से गुज़रे हैं, हॉकी  के ज्यादा लोकप्रिय न रहने का कारण एक यह भी है कि हमारे कुछ राष्ट्रीय स्तर के ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों ने भी मैदानों में हुल्लड़बाज़ी का प्रदर्शन किया है, गाली-गलोच का प्रदर्शन किया, एक-दूसरे को जान-बूझ कर चोटें मारी हैं, घायल किया है, जिस कारण अवाम को लगने लगा कि ‘हॉकी  सबसे ़खतरनाक खेल’ और हॉकी खिलाड़ी सबसे अधिक खतरनाक और अनुशासनहीन हैं।