बेरोज़गारी बढ़ी, युवा पीढ़ी विदेश जाने को मज़बूर


फिरोज़पुर, 13 जून (जसविन्द्र सिंह संधू) : यह चिंताजनक है कि देश की करीम रूपी कम्प्यूटर दिमाग जवानी का अच्छे भविष्य की तलाश में अपनों को छोड़ कर बेगानों की धरती विदेशों में जा बसने का सिलसिला जोरों से चल रहा है क्योंकि वार्षिक परीक्षाओं और आईलैट्स में उच्च अंक हासिल करने वाले होनहार नौजवानों का कनाडा, आस्ट्रेलिया आदि देशों की ओर जाने के लिए आज-कल दिल्ली हवाई अड्डे पर बाढ़ सी आई हुई है, जिसको रोकने वाला कोई नज़र नहीं आ रहा। वर्णनीय हैं कि दिन-रात किताबों के लेखे लगाने वाले नौजवान उच्च बुनियादी शिक्षा व उच्च डिग्रियिं हासिल करके भी रोज़गार को तरस रहे हैं, जिनको रोज़गार मांगने पर लाठियों से नवाज़ा जाता है। स्थायी रोज़गार न मिलने के कारण बेरोज़गारी की मारी और बुरे सिस्टम की मार झेल रही जवानी अच्छे भविष्य की आस में देश छोड़ने के लिए मजबूर हुई बैठी है, क्योंकि सत्ताधारियों द्वारा चुनावों से पहले किसी द्वारा घर-घर नौकरी और किसी द्वारा करोड़ों नौकरियों के दिखाए सबज़बाग जमीनी हकीकत में बदलते नज़र नहीं आ रहे। देश के भविष्य नौजवान वर्ग की विदेशों में बसने के लिए पढ़ाई के बहाने मारी जा रही उडारी असल में सुनहरी और सुरक्षित भविष्य के लिए रोज़गार की तलाश है। पढ़ाई करने के पश्चात् बहुसंख्या नौजवान विदेशों में ही सैट होने को पहल दे रहे हैं। वापिस आने वालों की संख्या बहुत कम हैं। आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कनाडा, अमरीका व इंग्लैंड बना पहली पसंद : आस्ट्रेलियां, न्यूज़ीलैंड, अमरीका व इंग्लैंड आदि देशों की वीज़ा शर्तें थोड़ी सख्त होने के कारण नौजवान वर्ग और उसके माता-पिता की कनाडा पहली पसंद बन चुका हैं। प्राप्त जानकारी अनुसार अकेले पंजाब के 3 लाख नौजवान लड़के-लड़कियां स्ट्डी वीज़े पर कनाडा उडारी मार रहे हैं। आस्ट्रेलियां, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, अमरीका और अन्य पश्चिमी व अरब देशों को जा रहे नौजवानों की संख्या 1-50 लाख के आसपास बताई जाती हैं। प्राप्त सूचना अनुसार कनाडा में 300 कालेज और यूनिवर्सिटियां हैं। एकलौते बच्चे भी माता-पिता को छोड़ कर भाग रहे हैं विदेश : ‘अजीत समाचार’ द्वारा किए गए सर्वे में देखा कि जहां प्रत्येक नौजवान विदेश बस कर डालर कमाकर खुशहाल होने के सपने सजाए बैठा है, वहीं 90 प्रतिशत नंबर लेने वाले नौजवान भी विदेशों में बसने को पहल दे रहे हैं। बेरोज़गारी के दैंत और सिस्टम की मार से बचाने के लिए माता-पिता अपने दिल पर पत्थर रख अपने पुरुखों की सम्पति बेचकर इकलौती औलाद को भी सुनहरी भविष्य और सुरक्षित जीवन देने के लिए अपने से कोसों दूर करने से जरा भी नहीं झिजक रहे और तो और बेटियां जिनको कभी माता-पिता द्वारा घर के बाहर अकेले पैर रखने की आज्ञा तक नहीं थी दी जाती, वह भी अब विदेशी धरती पर जा रही हैं। कालेजों में संख्या घटी व आईलैट्स सैंटरों में बढ़ी :  इंजीनियरिंग कालेज, आई.आई.टी. पोलीटैक्निक कालेज आदि तकनीकी संस्थाओं में दाखिला संख्या कम होने से जहां अधिकतर कालेजों के खर्चे पूरे ना होने पर प्रबंधक ताला लगाने के लिए मजबूर हुए बैठे हैं,वे कालेजों में आइलैट्स सैंटर खोल रहे हैं। सरकार द्वारा शिक्षा व रोज़गार से हाथ पीछे खींचना ही है कारण : इस संवेदनशील मामले पर ‘अजीत समाचार’ से बातचीत करते हुए उच्च बुद्धिजीवी और समाज के चिंतक प्रिंसीपल हंस राज,जाट राखवाकरण संघर्ष समिति पंजाब अध्यक्ष जत्थेदार करनैल सिंह भावड़ा, पंजाब यूथ क्लबज़ आग्रेनाईजेशन मालवा के अध्यक्ष लखबीर सिंह औलख, कानूनी माहिर सीनियर एडवोकेट शिवदीप सिंह संधू आदि ने होनहार युवाओं द्वारा देश छोड़ विदेश भागने के पैदा हुए कल्चर पर अति चिंता जाहिर करते हुए कहा कि बेशक नौजवानों द्वारा देश छोड़ना शौंक नहीं, बेरोज़गारी और सिस्टम में आ चुकी बुराईयों ने ही उनको विदेश जाने के लिए मजबूर किया है, पर यह सब गलत हैं।  उन्होंने कहा कि देश की सत्ता में समय-समय पर राज करती राज्य पक्ष अपने ़फर्ज पहचान कर नौजवान वर्ग की ऊमंगों को भापने और बातचीत टालमटोलों द्वारा पेट भरने वाले पुराने कल्चर को बंद कर नौजवान वर्ग को रोज़गार के अवसर पैदा करके दें और बिगड़ चुके सिस्टम को सुधारें।