विदेश मामलों के मंत्रालय ने  मालदीव को अपनी सलाह दोहराई


नई दिल्ली 14 जून - मालदीव के राजनीति तूफान ने भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थी . मौजूदा राष्ट्रपति अबदुल्ला यमीन ने न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के राजनीतिक बंदियों को रिहा करने के आदेश को मानने से इंकार कर दिया था , बल्कि चीफ जस्टिस को भी जेल में ठूंस दिया है. वहां के विपक्ष और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भारत से राजदूत और सैन्य सहायता भेजने की गुहार लगाई थी . दूसरी तरफ चीन ने कहा था  कि भारत को मालदीव के अंदरूनी मामले में दखल नहीं देना चाहिए. मालदीव में चीन का 70 फीसदी निवेश है.बही अब विदेश मामलों के मंत्रालय ने पूर्व राष्ट्रपति मौमून गयूम और पूर्व मुख्य न्यायाधीश अब्दुल्ला सईद सहित राजनीतिक कैदियों को रिहा कर चुनावी और राजनीतिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए मालदीव को अपनी सलाह दोहराई है ।