कश्मीरियों के प्रति संवेदी यू.एन. सिख पीड़ितों की ले सुध : यूनाईटेड सिख मूवमैंट


चंडीगड़, 18 जून (सुरजीत सिंह सत्ती) : भारत व पाकिस्तान में चलती कशमकश के दौरान जम्मू-कश्मीर में होती तकरारों के दौरान वहां के निवासियों को हुए जान-माल के नुक्सान के प्रति यूनाईटेड नेशन द्वारा उदारता दिखाते हुए लोगों के मानवीय अधिकारों के हनन होने की की बयानबाज़ी का यूनाईटेड सिख मूवमैंट नामक संस्था ने स्वागत किया है। परन्तु इसके साथ ही कहा है कि कश्मीरियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने वाले यूनाईटेड नेशन को सिख दंगों के दौरान व इसके उपरान्त उत्पन्न हुए हालातों पर गहरे प्रभाव में आए सिखों, की भी सुध लेनी चाहिए। संस्था के चेयरमैन डाक्टर भगवान सिंह, महासचिव कैप्टन चन्नण सिंह सीनियर उप-प्रधान गुरनाम सिंह व प्रैस सचिव हरप्रीत सिंह ने यहां एक प्रैस कान्फ्रैंस के दौरान रोष प्रकट करते हुए कहा है कि दिल्ली सिख दंगे यू.एन. के प्रतिनिधियों के समक्ष हुए व कभी भी यू.एन. ने पीड़ित सिखों के बारे उफ्फ तक न की परन्तु अब कश्मीरियों के बारे में उनके मानवीय अधिकारों के हो रहे हनन के बारे में संवेदनशीलता दिखाई है। संस्था के नेताओं ने प्रश्न खड़ा किया कि दिल्ली सिख दंगों के समय यू.एन. आंखों मूंदे क्यों बैठा रखा? उन्होंने कहा कि अब कश्मीरियों के बारे में बात करने वाले यू.एन. को चाहिए कि वह पीड़ित सिखों की सुध भी ले। नेताओं ने कहा कि संस्था का प्रतिनिधिमण्डल मंगलवार को दिल्ली में यू.एन. के मानवीय अधिकार विंग को मिलकर मांग पत्र देगा कि पिछले 30-35 वर्षों से जेलों में बंद लगभग 40-45 सिख बंदियों की रिहाई के लिए भारत सरकार से मामला चलाए व साथ ही दिल्ली सिख दंगों के पीड़ितों को मुकम्मल इन्साफ दिलाया जाए। इन नेताओं ने कहा कि इस बात का भी अंदेशा है कि कहीं बरगाड़ी कांड की असलियत ठीक उसी तरह दब कर न रह जाए, जैसे कि दिल्ली सिख दंगों के आरोपियों की गांठ अभी तक नहीं खुल सकी। नेताओं ने कहा कि पहले बादल सरकार द्वारा हाईकोर्ट के सेवामुक्त जज की अगुवाई में जांच कमिश्न बिठाया गया व तीन वर्ष बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी व अब इसी तरह कैप्टन सरकार द्वारा बिठाए कमिश्न की जांच भी लटक रही है।