प्रदेश में आक्सीटोसिन दवा पर पूर्ण प्रतिबंध


चंडीगढ़, 6 जुलाई (वार्ता) : पंजाब में आक्सीटोसिन दवा पर रोक लगाने तथा लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ते दुष्प्रभाव के मद्देनज़र अब इस दवा पर पूरी रोक लगाई जायेगी। यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा डेयरी विकास निदेशक काहन सिंह पन्नू ने आज यहां दी। उन्होंने विभाग को निर्देश दिये हैं कि इस दवाई के उपयोग पर पूर्ण पाबंदी को सख्ती से लागू कराया जाए। मिशन ‘तंदुरुस्त’ के निदेशक पन्नू ने बताया कि आक्सीटोसिन प्राकृतिक तौर पर पैदा होने वाला हारमोन है जो बच्चे के जन्म के समय दूध पिलाने वाली माताओं के लिये जरुरी है लेकिन इस दवाई का डेयरी उद्योग में बड़े स्तर पर दुरुपयोग हो रहा है। इस दवाई को भैंसों से अधिक दूध लेने के लिए उपयोग किया जा रहा है। दूध पीने से इसके दुष्प्रभाव के कारण मनुष्य में हारमोन का संतुलन बिगाड़ रहा है।  उन्होंने कहा कि इस दवाई का इस्तेमाल कद्दू, खरबूजा, बैंगन, घीया व खीरे जैसी सब्जियों का आकार बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। पंजाब में सभी रजिस्टर्ड सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों को सलाह दी जाएगी कि  इस दवाई के लिए कर्नाटक एंटीबायोटिक्स व फार्मास्यूटिकल लिमिटेड (केएपीएल) के साथ संपर्क करें। ज्ञातव्य है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 27 अप्रैल 2018 को अपने नोटिफिकेशन में औक्सीटौसिन की बिक्री पर पाबंदी लगाई है। यह नोटिफिकेशन पहली जुलाई 2018 से लागू है। एक जुलाई के बाद किसी भी प्राइवेट उत्पादक को इस दवाई का उत्पादन करने की अनुमित नहीं होगी।