महिला कर्मचारियों का ना डोप टेस्ट- हरसिमरत


चंडीगढ़, 10  जुलाई (वार्ता) : केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से अपील की कि सरकारी कर्मचारियों के डोप टेस्ट से महिला कर्मचारियों को अलग रखा जाए।      उन्होंने यहां जारी बयान में कहा कि महिला कर्मचारियों का डोप टेस्ट नहीं होना चाहिए क्योंकि इनका उन पर मनोवैज्ञानिक और पीड़ा देने वाला प्रभाव हो सकता है। श्रीमती बादल ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के डोप टेस्ट का फरमान प्रदेश में नशे की समस्या को काबू पाने में सरकार की विफलता से ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि नशे की तस्करी पर काबू पाया जाये, नशामुक्ति केंद्रों और पुनर्वास पैकेज को मजबूत किया जाये। उन्होंने यह भी कहा कि तीन लाख सरकारी कर्मचारियों का हर साल डोप टेस्ट कराया गया तो उस पर पंद्रह से बीस करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) नेता ने कहा कि इसके बावजूद यदि मुख्यमंत्री नहीं मानते तो कम से कम महिला कर्मचारियों को इससे बाहर रखें। उन्होंने कहा कि सरकार में महिला कर्मचारियों की संख्या 35 से 40 प्रतिशत है और इनका नशे से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने इसीके साथ आगामी पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुकों के लिए डोप टेस्ट अनिवार्य करने का प्रस्ताव भी खारिज करने को कहा। और कहा कि पचास प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं तथा यदि राजनीतिक कारणों से डोप टेस्ट के परिणामों में गड़बड़ी की गई तो इन्हें दिक्कत होगी।