सन्नी ने डीएसपी पर चलाई थी पहली गोली


एस. ए. एस. नगर, 16 जुलाई (जसबीर सिंह जस्सी) : लांडरां-खरड़ मार्ग पर पिस्टल की नौक पर वरना कार छीनने वाले सन्नी मसीह, जिसकी पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी, के पिता सुच्चा मसीह द्वारा इस मामले की सीबीआई जांच करवाने की मांग के उल्ट मोहाली पुलिस द्वारा आज दावा किया गया कि सन्नी मसीह पेशेवर मुलज़िम था और उसके पिता को सन्नी की गलत हरकतों बारे पूरी जानकारी थी। इस सबंधी ज़िला पुलिस प्रभारी कुलदीप सिंह चाहल ने बताया कि करीब 5 दिन पूर्व ही हिमाचल पुलिस एक मामले में सन्नी मसीह के घर छापा मारने गई थी। ज़िला पुलिस प्रभारी ने बताया कि गाड़ी छीनने के पश्चात् जैसे ही सुबह मोहाली पुलिस के डीएसपी रमनदीप सिंह और इंस्पैक्टर तरलोचन सिंह ढाबे के बाहर खड़ी गाड़ी के समीप पहुंचे, तो सन्नी मसीह ने डीएसपी पर पहले गोली चला दी, बाद में उक्त नौजवानों को डराने के लिए इंस्पैक्टर तरलोचन सिंह द्वारा पहले हवाई फायर किया गया, लेकिन सन्नी मसीह और डीएसपी आपस में भिड़ गए। इस दौरान गोल्डी मसीह द्वारा भी फायरिंग की गई तो जवाबी कार्रवाई में पुलिस को भी गोली चलानी पड़ी, जिसमें सन्नी मसीह घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई। ज़िला पुलिस प्रभारी अनुसार नैना देवी में हुई मुठभेड़ में मुलज़िम सन्नी और गोल्डी ने जिन पिस्टलों का प्रयोग किया था, वे पिस्टलें आंतकवाद दौरान इस्तेमाल की जाती थी। उन्हाेंने बताया कि गिरफ्तार जसवीर सिंह संजू निवासी धर्मकोट बग्गा ज़िला गुरदासपुर और वरुण सूद निवासी रत्नगढ़ थाना मोरिंडा से 1 देसी कट्टा 12 बोर, 2 कारतूस 12 बोर, 1 खिलौना पिस्टल, एक स्वीफ्ट कार की आरसी और लाल मिर्चों का पाऊडर बरामद हुआ है। उक्त दोनों को मोहाली की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 4 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि नैना देवी हिमाचल प्रदेश में हुई मुठभेड़ में सन्नी की हुई मौत के मामले में बिलासपुर हिमाचल प्रदेश में मेजिस्ट्रेट जांच चल रही है। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने स्विफ्ट डिज़ायर या वरना कार छीनने की योजना बनाई थी, क्योंकि इन कम्पनियों की कारों की आरसी वह पहले ही चोरी कर चुके थे। उक्त पांचों ने वरना कार चालक नवनीत को रोका और सन्नी मसीह द्वारा नवनीत पर दो फायर किए गए, जोकि उसके पैरों के नज़दीक लगे। गोल्डी मसीह कलानौर में दज़र् मामले में जून में ज़मानत पर बाहर आया था। गोल्डी मसीह दोराहा में एक समाध बना कर रहता था और साथ ही देसी डाक्टर की दुकान भी करता था, जबकि संजू करीब डेढ वर्ष से उसके पास रहता था। इस दौरान वरुण सूद की मां गोल्डी से देसी दवाई लेने जाती थी और वरुण उस समय गोल्डी के सम्पर्क में आया।