कंगाली की कगार पर पहुंचा ट्रकों का धंधा


फाज़िल्का, 24 सितम्बर(अमरजीत शर्मा): बढ़ती डीज़ल की कीमतों ने ट्रक ऑपरेटरों को कंगाल करके रख दिया है। पंजाब में 90 हज़ार ट्रक ऑपरेटरों का गुजारा किराए से ही चलता है। मगर आसमान चढ़े डीजल के रेटों ने जहां ट्रक ऑपरेटरों को भिखारी बना दिया है, वही  हज़ारों चालकों, परिचालकों का धंधा चौपट होने के कारण  बेरोजगार हो गए हैं। प्राप्त ब्योरे के अनुसार पंजाब में 90 हज़ार ट्रक, घोड़े ट्राले हैं। एक ट्रक के आसपास मालिक, चालक व परिचालक के परिवारों का जीवन चलता है। मगर किराए में वृद्धि न होने के कारण 25 हज़ार ट्रक ट्राले और घोड़े ट्राले बिकाऊ हैं। मगर उनका कोई खरीददार नहीं। पंजाब में ट्रक यूनियनें खत्म होने के बाद ट्रक मालिकों को काम भी खुद ढूंढना पड़ रहा है। जिस कारण अनेक ट्रक तो घरों में ही खड़े हैं। प्राप्त ब्योरे अनुसार ट्रक ऑपरेटरों को बड़ी मार के बिना परमिट से चल रही ट्रैक्टर ट्रालियों से पड़ रही है। क्योंकि यह सरेआम रेत, बजरी ओवरलोड करके सड़कों पर चलते हैं। मगर इन्हें रोकने वाला कोई नहीं। जब कि ट्रक मालिक ओवरलोडिंग करता है तो ट्रक मालिक को प्रति टन के हिसाब से हजारों रूपये का जुर्माना ठोक दिया जाता है। आर.ओ.टी.ओ. और ट्रांसपोर्ट कार्यालय के अधिकारी भी जमकर ट्रक वालों का सोशन करते हैं। बाकी कसर टोल प्लाजा पूरी कर देते हैं। डीजल, स्पेयर पार्टस और टायरों की कीमतें भी लगतार बढ़ रही हैं। मगर पिछले दस साल से किराए के रेट भी वही हैं। सूत्र बताते हैं कि गुजरात और महाराष्ट्र की बंदरगाहों पर जाने वाले माल का किराया 110 और 160 के करीब प्रति क्विंटल है। मगर लगातार काम न मिलने के कारण ट्रक खड़े हो गए हैं। ट्रक मालिकों को बीमा, परमिट, फिटनस, चालकाें व परिचालकाें का वेतन और टायरों पर 4 से 5 लाख रूपये खर्चा हर साल होता है। इस मक्कड़ जाल में से न तो निकला जा रहा है और न ही कोई और धंधा किया जा सकता है। केन्द्र सरकार ने अपने द्वारा डीजल की कीमतें कम करने ओर जी.एस.टी. के दायरे में लाने की बजाए, उल्टा ट्रकों की भार ढोने की समर्था प्रतिएक्सल के हिसाब से बढ़ा दिया। इससे राहत तो क्या, हादसे बढ़ेंगे। ट्रक यूनियन के पूर्व प्रधान परमजीत सिंह वैरड़ ने कहा कि किसानों के बाद ट्रक मालिक भी पूरी तरह से कंगाल हो चुके हैं। अगर सरकार ने इस तरफ ध्यान न दिया तो ट्रक मालिक, चालक व परिचालक भी खुदकशियों के लिए मजबूर हो  जाएंगे। उन्हाेंने पंजाब सरकार व केन्द्र सरकार से मांग की है कि डीजल पर लगाए टैक्स वापिस लिए जाएं और प्रति किमी के हिसाब से किराया निर्धारित किया जाए।