ई-वे बिल की सीमा में फेरबदल के साथ पड़ेगा वसूली पर असर


चंडीगढ़, 21 अक्तूबर (शिव शर्मा) :  पंजाब में दोबारा 50 हज़ार से अधिक मूल्य का सामान भेजने का फैसला लागू होने के बाद औद्योगिक क्षेत्र भी अब परेशानी महसूस करने लग पड़े हैं। सरकार ने कुछ महीने पहले तो यह सीमा 50 हज़ार रुपए से बढ़ाकर 1 लाख कर दी थी परंतु दोबारा इसकी सीमा अब 50 हज़ार करने के बाद औद्योगिक क्षेत्र दोबारा 50 हज़ार से अधिक मूल्य का सामान भेजने के लिए कम्प्यूटरों के चक्कर में फंस गए हैं जिस कारण कई बार तो सरवर धीरे चलना हो तो आनलाइन बिल तैयार करने के लिए परेशानी आती रहती है। सरकार ने दोबारा 11 के लगभग वस्तुओं पर 50 हज़ार से सीमा बढ़ाकर 1 लाख की है। जिनमें 1 में लोहा, स्टील, 2. नान फेर मैटल, फिनशिंग उत्पाद, 3. तम्बाकू और इसे बनने वाले उत्पाद, पान मसाला, कत्था, 4 फर्नीचर, 5. प्लाईवुड, ब्लैक बोर्ड, डैकोरेटिव और लैमीनेटिड शीट, 6 टिंबर, 7. बिल्डिंग मटीरियल मार्बल, ग्रेनाइड, कोटा स्टोन, रैड सैंड स्टोन, 8 सीमैंट, 9 सारे प्लास्टिक की वस्तुएं, प्लास्टिक पाऊडर व अन्य। 10 सभी तरह के यार्न ओरिएंटल यार्न फाईबर, पोलीस्टिर चिप्स, वेस्टेज और 11वीं सभी तरह के तेलों को 1 लाख की हद में शामिल किया गया है। यदि दोबारा 1 लाख की सीमा कर दी जाए तो इसके साथ जी.एस.टी. वसूली में वृद्धि होगी। ई-वे बिल लागू करने के बाद तो कईयों ने आनलाइन की लम्बी होती कार्रवाई से बचने के लिए 50 हज़ार से ज्यादा सामान टैम्पो से छोड़कर रेहड़ियां पर सामान भेजने का काम शुरू कर दिया था। 
उद्योगपति का कहना था कि 50 हज़ार के मूल्य का सामान तो कुछ भी नहीं होता और उसको भेजने के लिए आनलाइन प्रक्रिया काफी मुश्किल होती है और 1 लाख की हद करने में कुछ समय राहत मिली थी जिस कारण सामान आसानी के साथ चला जाता था जबकि अब दोबारा सामान भेजने के लिए परेशानी होगी। विभाग को यह आशंका था कि रेहड़ियों पर न सिर्फ 50 हज़ार का सामान बल्कि 1 लाख का सामान भी आ जाए तो इसका पता नहीं चलता है। उधर केन्द्र सरकार ने लोगों की मांग को मानते हुए जी.एस.टी. आर. 3बी की रिटर्न फाइल करने के अवधि में वृद्धि कर दी है क्योंकि पहले यह अहम रिटर्न 20 अक्तूबर तक जमा करवाई जानी थी परंतु अब 25 अक्तूबर को जमा करवाई जाएगी। यह रिटर्न इस कारण भी अहम है क्योंकि  वह जी.एस.टी. अपनी रिटर्नों  में गलतियां कर चुके हैं, वह अब जमा होने वाली रिटर्न में गलतियों को शोध करते हैं क्योंकि इसके बाद केन्द्र द्वारा गलतियां दुरुस्त करने के लिए समय नहीं मिलेगा। जल्दी ही जी.एस.टी. डीलरों को अब वार्षिक अपनी आडिट की रिटर्नें और 2 करोड़ से अधिक वार्षिक कारोबार करती फर्मों को अपनी वार्षिक रिटर्नें जमा करवानी पड़ेगी।