पी.यू. में पंजाबी को पहली भाषा का दर्जा दिलाने के लिए 10 विद्यार्थी सगंठनों में हुआ एकजुट


चंडीगढ़, 21 अक्तूबर (मनजोत सिंह जोत): पंजाब यूनिवर्सिटी में मां-बोली पंजाबी को पहली भाषा का दर्जा दिलाने के लिए दस विद्यार्थियों द्वारा एकजुट हो कर एक सांझा मंच ‘मां-बोली चेतना मंच’ का गठन किया गया है, जिस द्वारा विद्यार्थियों ने मां-बोली की अहमियत बारे सुचेत करने की एक मुहिम भी चलाई है। सांझा मंच का गठन विद्यार्थी संगठन आईसा, आई.एस.ए., एन.एस.यू.आई., एस.एफ.एस., ए.आई.एस.एफ., पी.पी.एस.ओ., पुसू, पी.एस.यू. (ललकार), सथ, सोई, विद्यार्थी कौंसल द्वारा किया गया है। जिसके तहत मंच द्वारा 30 अक्तूबर मां-बोली की महत्ता और पंजाब यूनिवरसिटी में पहली भाषा पंजाबी क्यों के विषय पर एक सैमीनार करवाने का फैसला किया गया है। मंच अनुसार विद्यार्थियों को अपनी मां-बोली में उच्च शिक्षा पढ़ने का प्रबंध होना चाहिए और प्रत्येक संस्थाओं से संबंधित कार्य में मां-बोली को पहला दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी मां-बोली के प्रफुलित होने का मुख्य साधन उसके क्षेत्र में पड़ते  शैक्षणिक संस्थान होते हैं। उन्होंने कहा कि जब शैक्षणिक संस्थाओं में मां-बोली की जगह किसी बाहरी  भाषा को मुख्य भाषा मनाया जाता है तो सिर्फ मां-बोली का विकास ही नहीं रुकता, बल्कि उस क्षेत्र के समूचे लोगों के बहुपक्षीय विकास में बड़ी रुकावट खड़ी हो जाती है। मंच ने कहा कि पंजाबी को पहली भाषा का दर्जा देने के बाद दूसरी या तीसरी भाषा के बतौर किसी भी भाषा से मंच को कोई इतराज़ नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी मुख्य मांगों में अहम मांग यह भी है कि विद्यार्थियों को अपनी मां-बोली में (पंजाबी, हिन्दी या अन्य) इम्तिहान देने, खोज करने की आज़ादी हो और युनिवर्सिटी द्वारा उपरोक्त भाषाओं में शिक्षा सामग्री का भी प्रबंध किया जाए।