बंदी छोड़ दिवस पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कौम के नाम दिया संदेश


अमृतसर, 8 नवम्बर : बंदी छोड़ दिवस के मौके पर श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कौम के नाम संदेश देते हुए कहा कि  84 की सिख नस्लकुशी को सिख कभी भूल नहीं सकते और ना ही इस घटना को कभी भुलाया जा सकता है। श्री अकाल तख्त साहिब में आयोजित समारोह में शिरोमणि कमेटी प्रधान गोबिंद सिंह लौंगोवाल, श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जगतार सिंह, तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, दमदमी टकसाल के मुखी ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा व प्रसिद्ध कथावाचक भाई रणजीत सिंह गौहर व लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में कौम के नाम संदेश देते हुए जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि जून तथा नवंबर 1984 में समय की केन्द्र सरकार द्वारा की गई सिखों की नस्लकुशी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की लगातार हो रही घटनाओं, जेलों में बंद अपनी सजाएं पूरी कर चुके बंदी सिखों की रिहाई ना होना और देश अंदर सिखों को निशाना बनाकर कत्ल करने जैसे अपराधों ने भारत अंदर सिखों को बेगाना होने का अहसास करवाया है। उन्होंने कहा कि समय की सरकारों, देश के कानून और अदालतों ने सिखों को इंसाफ ना देकर कौम को दर्द ही दिया है। जत्थेदार ने कहा कि गहरी साजिश के तहत सिख इतिहास, सिख परंपराओं के साथ छेड़छाड़ तथा पंजाबी सभ्याचार में आ रही गिरावट के कारण सिख नौजवानी को कुमार्ग की ओर धकेला जा रहा है। यह सभी कार्यवाहीयां पंथक शक्ति को तोड़ने का प्रयास है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सिखों द्वारा अपने विचार रखते हुए एक दूसरे प्रति निचले स्तर की प्रयोग की जा रही शब्दावली को सिख नैतिकता को नष्ट करना बताया। उन्होंने कहा कि सिख पंथ को इस प्रकार की कार्यवाहीयों से सुचेत रहने के लिए कहा है। साथ ही उन्हाेंने 2019 में मनाई जा रही गुरू नानक देव जी की 550वीं प्रकाश पर्व शताब्दी को मनाने के लिए सभी को एकजुट होने की अपील की। इस मौके पर शिरोमणि कमेटी प्रधान गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने श्रद्धालुओं को बंदी छोड़ दिवस की बधाई देते हुए कहा कि गुरू नानक देव जी ने हिन्दुस्तान की भाषा, सभ्याचारक और रीति रिवाज बचाने के लिए जो मिशन आरंभ किया उसको छठे पातशाह श्री गुरू हरगोबिंद साहिब जी ने आगे बढ़ाते हुए जुल्म और अन्याय विरूद्ध अवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि आज कुछ पंथ विरोधी शक्तियां गुरू इतिहास और सिख इतिहास को बिगाड़ने के लिए चालें चल रही हैं जिनसे सुचेत होने की जरूरत है। शिरोमणि कमेटी प्रधान ने अपने संबोधन दौरान शहीद भाई मनी सिंह को भी याद किया और उनके जीवन से संगतें तथा खासकर सिख नौजवानी को प्रेरणा लेने की अपील की। इस दौरान ज्ञानी जगतार सिंह, ज्ञानी रघबीर सिंह, बाबा हरनाम सिंह खालसा तथा ज्ञानी रणजीत सिंह ने भी आई संगत को संबोधित किया।इस मौके पर जूनीयर उपप्रधान हरपाल सिंह, अंतरिंग कमेटी मैंबर भगवंत सिंह सियालका, गुरमीत सिंह, गुररिंदर पाल सिंह, धर्म प्रचार कमेटी मैंबर अजायब सिंह, मुख्य सचिव डा. रूप सिंह, सचिव मनजीत सिंह, अवतार सिंह, दिलजीत सिंह बेदी, मनजीत सिंह, जसविंदर सिंह, बलविंदर सिंह, सुखमिंदर सिंह, सुखदेव सिंह, परमजीत सिंह, महिन्दर सिंह, गुरबचन सिंह, सिमरजीत सिंह, जगजीत सिंह, दर्शन सिंह, भाई अमरजीत सिंह आदि मौजूद थे।