अपने जाल में क्यों नहीं फंसती?


प्रिय मित्रों क्या आप जानते हैं कि मकड़ी अपने ही जाल में क्यों नहीं फंसती? मकड़ी का जाल जितना बारीक होता है उतना ही खतरनाक भी होता है। अपने इसी जाल की मदद से वो शिकार फंसाती है। एक बार जो इस जाल में फंस गया उसकी तो फिर खैर नहीं। इसमें फंसा कीड़ा कभी बच नहीं पाता। वास्तव में मकड़ी अपने जाल में इसलिए नहीं फंसती क्योंकि अपने जाल के धागे मकड़ी खुद बनाती है, उसके शरीर से तरह-तरह के रस निकलते हैं इन रसों से वह तरह-तरह के धागे बनाती है अगर आप इस जाल को ध्यानपूर्वक देखेंगे तो आपको ज्ञात होगा कि इसमें अधिकतर दो तरह के धागे होते हैं, कुछ धागे बीच में से बाहर की तरफ जाते हैं और साइकिल के पहिए की तीलियों जैसे नजर आते हैं तथा अन्य धागे इनके मध्य गोलाकार आकृति में सजाए जाते हैं इन्हें छूने पर यह धागे चिपचिपे प्रतीत होते हैं और इन्हीं में जा फंसता है शिकारी मकड़ी का शिकार। हैरानी की बात यह है कि वह इन चिपचिपे धागों पर भी चल पाती है। वास्तव में उसकी टांगों के पंजों की बनावट खास तरह की होती है जिस कारण वह चिपचिपे धागों पर चल पाती है, उसे भी इन धागों पर संभलकर चलना पड़ता है क्योंकि कहीं उसके शरीर का दूसरा भाग धागों से छू न जाए, अगर ऐसा हो तो शिकारी खुद अपने बुने जाल का शिकार हो जाएगा।

— प्रतिभा ठाकुर
गांव मटाक, डा. तरनोह, तह. सदर, ज़िला मंडी, हि.प्र.-175001