क्या आरक्षण के दम पर लोकसभा चुनाव जीतेगी मोदी सरकार ?


देखा जाए तो लोकसभा के चुनाव आने ही वाले हैं। सभी पार्टियां पूरे जोश में हैं। सब को पता है जिस प्रकार फिल्म जगत में आजकल एक फिल्म को लेकर शोर मचा हुआ है, उस पर कई आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन पिल्म तो फिल्म है, चाहे अच्छी हो या बुरी। हमारी सरकार किसी एक चीज़ को लेकर तो बैठ ही जाती है। उसी प्रकार दूसरी ओर एक नया खिलौना ‘आरक्षण’ कुछ दिनों से चर्चा में है जिसका मोदी ने पूरी तरह से फायदा उठाया। फायदा उठाए भी क्यों न भाई, आगे फिर पांच वर्ष राज जो करना है। लोगों को लूटना है। देश विकास की ओर जा रहा है। ऐसा बोलना भी तो है। मोदी ने 10 प्रतिशत आरक्षण में संशोधन करके इसको लागू करवा दिया है। इसमें लिखा है कि गरीबों को फायदा ही फायदा होगा। मतलब 8 लाख रुपए प्रति वर्ष जो व्यक्ति कमाता है, उसको आरक्षण मिलेगा। यहां देश में आधी से ज्यादा आबादी को खाने की रोटी नहीं मिलती। वह बाबू 8 लाख कहां कमायेगा और उसको क्या फायदा होगा। पिछड़े वर्गों को आरक्षण पहले भी मिल चुका है, लेकिन पूरी तरह से नहीं। मोदी ने इस बिल को सिर्फ अपनी जीत और वोटों के लिए रखा था। वर्ना इसको पास करने से पहले सभी दलों की सहमति ज़रूरी थी जो उन्होंने नहीं ली। 8 लाख से ऊपर वाले सिर्फ 5 प्रतिशत लोग हैं देश में। हमारे देश में सवर्णों की जनसंख्या 31 करोड़ है और ऐसा तो ओ.बी.सी. वाले कहेंगे कि जनसंख्या के हिसाब से 54 प्रतिशत आरक्षण उनका होना चाहिए। अगर सचमुच मोदी गांधी जी की राह पर चलते हैं तो सच का राह ही अपनाएं। सभी को समान अनुपात में रखकर और आबादी के अनुपात के अनुसार आरक्षण दें। केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि भारत दुनिया की अच्छी अर्थव्यवस्था में आता है। इसका फायदा लम्बे समय तक रहेगा। क्या सचमुच 2019 में आरक्षण के दम पर जीतेगी मोदी सरकार? मोदी ने गरीब स्वर्णों को आधार बनाया है। अब यह जनता पर निर्भर करता है कि सच को किस प्रकार से देखा जाए। जनता ने सोचना है कि क्या आगे मोदी के जाल में फंसना है या नहीं, कि बस ऐसे छोटे-छोटे आरक्षण लेकर बैठना है नौकरियों के बगैर। आरक्षण का संबंध और फायदा नौकरी में होता है न कि घर बैठकर।

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