घाटे का सौदा साबित हो रहा है विरासती स्मारकों का नवनिर्माण



अमृतसर, 12 फरवरी (सुरिन्द्र कोछड़): स्थानीय राम बाग (कम्पनी बाग), दरवाज़ा राम बाग, समर पैलेस (महाराजा रणजीत सिंह का गर्मियों का महल), बुंगा रामगढ़िया, 40 खूह पार्क, गोल बाग पार्क, किला गोबिंदगढ़, बिजली सप्लाई प्लांट, फूड स्ट्रीट, शहर की पुरानी दीवार, राम बाग की ड्योढ़ी व दीवार आदि अन्य स्मारकों को सुरक्षित करने हेतु शुरू किए निर्माण कार्यों पर करोड़ाें रुपए खर्च किए जाने के बाद यह कार्रवाई किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।  इसके अलावा जिन स्मारकों के नवनिर्माण व सौंदर्यीकरण की कार्रवाई काफी हद तक मुकम्मल कर ली गई है, उनका भी काम बिना कारण बताए अधर में रोक दिए जाने के बाद उनकी हालत फिर से बद्दतर बनती जा रही है।
पिछले 15 वर्ष से शुरू किया गया राम बाग स्थित महाराजा रणजीत सिंह के समर पैलेस व बाग के अन्य स्मारकों के नवनिर्माण का काम जहां अभी भी अधर में लटका हुआ है, वहीं बाग में मौजूद क्लबों के सीवरेज का दूषित पानी स्थापित स्मारकों के लिए खतरा बना हुआ है।  
इसके अलावा जौड़ा फाटक के साथ लगती दशमेश नगर आबादी में 116 वर्ष पुराने व एक साथ बनाए गए 40 कुओं के खस्ता हो चुके ढांचाें व रोज़ गार्डन 40 खूह का नवनिर्माण मुकम्मल होने के बावजूद  इनका अभी तक उद्घाटन नहीं हो सका। 
वहीं अमृतसर की जी.टी. रोड के साथ लगती कैनाल लिंक रोड पर बिजली सप्लाई प्लांट की 100 वर्ष पुरानी इमारत को पिकनिक स्पाट में बदलने हेतु शुरू किया गया नवनिर्माण के मुकम्मल होने के बावजूद नहर में लगे मलबे के ढेर के कारण उक्त स्मारक में खड़े पानी से नुक्सान पहुंचने का खतरा बना 
हुआ है।